Drone किसानों की 'तीसरी आंख' बन सकते हैं, खेतों में तकनीक के इस्तेमाल का तरीका सीखें
खेती-किसानी को आधुनिक बनाने के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है। बात जमीनों की मैपिंग में ड्रोन के इस्तेमाल की हो, या कीटनाशकों के छिड़काव में ड्रोन की मदद लेने की। कई सफल प्रयोग किए जा चुके हैं। पढ़िए रिपोर्ट
नई दिल्ली, 15 मई : खेती-किसानी के क्षेत्र में कामयाबी के झंडे गाड़ने वाले लोगों का मानना है कि विज्ञान के प्रयोग से किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। बदलते दौर के साथ विज्ञान में अत्याधुनिक तकनीक और आविष्कार सामने आ रहे हैं। ऐसी ही एक तकनीक है ड्रोन। विशेषज्ञों का मानना है कि एग्रीकल्चर सेक्टर में ड्रोन की मदद से खेती-किसानी के कई काम आसान बनाए जा सकते हैं। बता दें कि वनइंडिया हिंदी इससे पहले एग्रीकल्चर में ड्रोन पर रिपोर्ट प्रकाशित कर चुका है। किसान ड्रोन की शुरुआत के मौके पर खुद पीएम मोदी ने कहा था कि ड्रोन की मदद से भारत में कृषि का नया चैप्टर लिखा जा सकता है। वनइंडिया हिंदी की इस रिपोर्ट में पढ़ें भारत के किसानों के लिए ड्रोन खेती में कितना उपयोगी है ?

ड्रोन : दुर्गम इलाकों में बड़े काम की चीज
ड्रोन की तकनीक का इस्तेमाल ऊर्जा बचाने के मकसद से किया जाता है। जानकारों के मुताबिक ड्रोन को बहुत कम प्रयास, समय और ऊर्जा की जरूरत होती है। सुदूर और दुर्गम इलाकों की जानकारी लेने में भी ड्रोन काफी कारगर हैं। ड्रोन ऑपरेटर को चैलेंजिंग लोकेशन में जाने की जरूरत नहीं पड़ती। व्यक्ति दूर से ड्रोन संचालित और नियंत्रित कर सकता है। केंद्र सरकार का मानना है कि इजरायल, चीन और अमेरिका जैसे मॉडर्न टेक्नोलॉजी से लैस देशों में खेती में तकनीक का भरपूर उपयोग होता है। इन देशों के एग्जाम्पल से समझा जा सकता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जियो-टैगिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग, और फार्म मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर जैसी तकनीकों से किसानों की उपज और आय दोनों बढ़ाई जा सकती है।

किसानों की जमीनों की मैपिंग में ड्रोन का इस्तेमाल
ड्रोन कितने प्रभावी तरीके से काम कर सकता है, इसका प्रमाण फरवरी, 2022 में उस समय मिला जब किसानों की जमीन की मैपिंग के लिए ड्रोन का इस्तेमाल शुरू किया गया। हरियाणा सरकार ने लोगों को भूखंड का स्वामित्व देने के लिए ड्रोन से सर्वे करने के बाद कई अहम फैसले लिए। ड्रोन से खेतों का डिजिटल नक्शा तैयार कराया जा रहा है। बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2022-23 में इसका ऐलान किया था।
किसान ड्रोन का इस्तेमाल कहां
बजट में ड्रोन के प्रावधान के संबंध में वित्त मंत्री ने कहा था, किसानों की आय बढ़ाने के लिए डिजिटल और हाई टेक्नोलॉजी सर्विस से जोड़ा जाएगा। फसलों पर कीटनाशकों के छिड़काव और बुआई के लिए ड्रोन के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा। फसलों के मूल्यांकन और खेती वाली जमीनों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने में भी ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा।

किसानों के लिए बिहार के युवक ने बनाया ड्रोन
ड्रोन की संभावनाओं को लेकर युवाओं के बीच विशेष उत्साह दिखता है। ऐसा ही उत्साह दिखा बिहार के एक युवा में। मधुबनी में रहने वाले 12वीं पास युवा देवेश झा ने कमाल दिखाया और ऐसा ड्रोन तैयार किया जिससे किसानों का काम आसान बनाया जा सके। किसानों के लिए ड्रोन तैयार करने वाले देवेश बताते हैं कि किसान उनके ड्रोन का इस्तेमाल कीटनेशकों के छिड़काव के लिए करते हैं। अब तक 30 हजार एकड़ खेत में कीटनाशकों का छिड़काव किया जा चुका है। बकौल देवेश, कई मजदूरों की मदद से होने वाला काम कम मैनपावर के अलावा कम समय में हो रहा है।

ड्रोन से मौसम पूर्वानुमान !
किसानों के लिए ड्रोन की उपयोगिता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मौसम पूर्वानुमान के लिए ड्रोन के इस्तेमाल का प्लान बनाया है। गत 9 जून को वनइंडिया हिंदी ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि वेदर बैलून से मौसम पूर्वानुमान से आगे बढ़कर अब ड्रोन की मदद से मौसम का सटीक आकलन किया जाएगा। खबर के मुताबिक वेदर बैलून ड्रोन की तुलना में काफी महंगा भी है। ऐसे में वायुमंडल का डेटा जमा करने के लिए अब ड्रोन के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। IMD ड्रोन से मौसम पूर्वानुमान और वेदर बैलून के पूर्वानुमान के आंकड़ों की तुलना करने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लेगा।

ड्रोन किसानों की 'तीसरी आंख' !

सरकार ने बताया ड्रोन सेक्टर में कितनी क्षमता

भारत में बने ड्रोन की कैपेसिटी
ड्रोन निर्माता थीटा एनरलिटिक्स के अध्यक्ष और सह-संस्थापक करण धौल बताते हैं कि ड्रोन का उपयोग कृषि के अलावा वन प्रबंधन सेवाओं में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पुलिस और बिजली विभाग के अलावा खनन कंपनियों के कई काम ऐसे हैं, जो ड्रोन की मदद से काफी आसनी से किए जा सकते हैं। धौल अपनी कंपनी- थीटा एनरलिटिक्स के ड्रोन की विशेषता बताते हुए कहते हैं, हमारे ड्रोन मिश्रित सामग्री से बने हैं। इस क्लास के दूसरे ड्रोन की तुलना में थीटा के ड्रोन की फ्लाइंग टाइम अधिक है। यानी ये अधिक उड़ान भरने में सक्षम हैं। बकौल धौल, थीटा फाल्कन ड्रोन एक बार में 150 मिनट तक उड़ सकता है। एक किलोग्राम तक सेंसर और पेलोड का भार भी उठा सकता है।

ड्रोन से सेवाएं होंगी किफायती !
ड्रोन टेक्नोलॉजी के जानकार प्रोफेसर धर्मेंद्र सिंह बताते हैं कि भारत में ड्रोन का बड़ा बाजार है। मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर सिंह बताते हैं कि ड्रोन सेक्टर में अब कई निजी कंपनियां सामने आ रही हैं। इससे ड्रोन की लागत कम होगी। विभिन्न क्षेत्रों में ड्रोन का उपयोग किया जा सकेगा। उन्होंने कहात, संभव है कि निकट भविष्य में भारत में कृषि, वितरण प्रणाली, परियोजना निगरानी और स्वास्थ्य क्षेत्र मेंड ड्रोन की मदद से किफायती सेवाएं मिलें।

ड्रोन ऑपरेशन में अड़चनों की आशंका
दी प्रिंट की एक रिपोर्ट में कहा गया, भारत के पास पर्याप्त बुनियादी ढांचा है। अच्छी आपूर्ति श्रृंखला और ड्रोन तैनात करने की उत्कृष्ट तकनीकी क्षमता होने के बावजूद प्रोफेसर धर्मेंद्र सिंह को लगता है कि ड्रोन के ऑपरेशन को लेकर कुछ चिंताएं बनी हुई हैं। उन्होंने कहा, गोपनीयता, गुप्त निगरानी या जासूसी और ड्रोन के बीच टकराव हो सकते हैं। उन्होंने कहा, कुछ ऐसी चिंताएं हैं, जो भारत में ड्रोन के इस्तेमाल में बाधाक बन सकती हैं। ऐसे में एक विस्तृत नीति की जरूरत होगी।












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