पाक की तरफ से आई टिड्डियों का किया खात्मा लेकिन उनके अंडों से चिंतित हैं किसान

गांधीनगर। पाकिस्तान की तरह से गुजरात आने वाले टिड्डियों के दल से सुरक्षा के लिए कृषि विभाग की टीमों ने उत्तरी गुजरात के क्षेत्रों में दवाओं का छिड़काव किया है। यहां खासतौर पर बनासकांठा जिले के वाव और सूइगाम तालुका के 400 हेक्टेयर क्षेत्र में दवा छिड़की गई है। अधिकारियों का दावा है कि टिड्डियां (Desert locust) नष्ट कर दी गई हैं। मगर, किसान अभी भी चिंतित हैं, क्योंकि बड़ी संख्या में ​टिटिड्यों के अंडे बचे रह गए हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एक टिड्डी 180 अंडे देती है। यदि 10 हजार टिट्डियों ने भी अंडे दिए होंगे तो फसलों पर बड़ा खतरा अब भी मंडरा रहा है।

किसानों ने ​टिड्डियों के झुंड से राहत पाई, मगर..

किसानों ने ​टिड्डियों के झुंड से राहत पाई, मगर..

बनासकांठा जिले के सीमावर्ती इलाकों में किसानो को डर है कि, जब अंडे में से टिड्डियां निकलेंगी वे उनकी फसल को बरबाद कर देंगी। हालांकि, किसानों ने फिलहाल ​टिड्डियों के झुंड से राहत पाई है, क्योंकि पता चलते ही सरकार ने टीमें भेज दीं। केंद्रीय दल और जिला कृषि विभाग के अधिकारी टिड्डी नियंत्रण के लिए वाव और सूइगाम तालुका के गांवों में नियंत्रण में लगे हुए हैं। इस टीम ने 400 हेक्टेयर के कुल क्षेत्र में कीटनाशकों का स्प्रे से छिड़काव किया।इन कीटनाशक दवाओं के कारण बहुत सी टिड्डियां तो मर गईं, मगर अंडों का खात्मा नहीं हो पाया है।

इसलिए किसानों के लिए बरबादी का प्रतीक हैं ये टिट्डी

इसलिए किसानों के लिए बरबादी का प्रतीक हैं ये टिट्डी

रण टिड्डियां एक अंतरराष्ट्रीय कीट है और कृषि का पुराना दुश्मन है, जो दुनिया के कई देशों में फैले हुए हैं। टिड्डियों का झूंड 60 देशों के लगभग तीन करोड़ वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को कवर करता है। रण टिड्डियां ओमान, सउदी अरब, इरान, पाकिस्तान से भारत के सीमावर्ती राज्य राजस्थान, पंजाब और गुजरात में आक्रमण करती है। इन क्षेत्रों मे एक साथ 80,000 वर्ग मील के क्षेत्र को कवर करती हैं।

1993 की साल में दिखाई दी थीं रण टिड्डियां

1993 की साल में दिखाई दी थीं रण टिड्डियां

पिछली बार गुजरात में 1993 की साल में रण टिड्डियां दिखाई दी थीं, तब किसानों की फसल बरबाद हो गई थी। केंद्र ने गुजरात सरकार को एक पत्र लिखा था, जिसमें सरकार को टिड्डियों के हमलों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा।

इन​ जिलों में बरबाद हुई थीं फसलें

इन​ जिलों में बरबाद हुई थीं फसलें

केंद्र के दिशा निर्देश में कच्छ, जामनगर, द्वारका, पाटन और बनासकांठा जैसे जिले शामिल थे। केंद्र ने राज्य के कृषि निदेशालय को प्रशिक्षित करने के बारे में सूचित किया था।

मेलाथियोन 96% यूएलवी का छिड़काव

मेलाथियोन 96% यूएलवी का छिड़काव

27 जून को बनासकांठा जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में फिर रण टिड्डियां दिखाई दीं। उस समय कृषि अधिकारी ने कई जगह का दौरा किया था और फील्ड कर्मचारियों को नियंत्रण के बारे में जानकारी प्रदान की। इसके बाद, केंद्रीय टीमों के साथ गुजरात के कृषि विभाग की टीमों द्वारा कीटनाशक (मेलाथियोन 96 प्रतिशत यूएलवी) का छिड़काव किया गया।

किसान अब भी भयभीत, अंडों को नष्ट नहीं किया जा सका

किसान अब भी भयभीत, अंडों को नष्ट नहीं किया जा सका

दावा किया गया है कि, सभी रण टिड्डियों को खत्म कर दिया गया। हालांकि, बनासकांठा के किसान अब भी भयभीत है, क्योंकि रण टिड्डियां तो खत्म हो गई, लेकिन उनके अंडों को नष्ट नहीं किया जा सका, जो कई खेंतो में फैले हुए हैं।

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