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Jatadhara Movie Review: आस्था, रहस्य और साइंस से सजी है सोनाक्षी सिन्हा की फिल्म जटाधारा, पढें रिव्यू

Jatadhara Movie Review in Hindi: जटाधारा कोई एक थ्रिलर फिल्म है। जिसमें ऐसा अनुभव है जो आस्था, साइंस और अध्यात्म को एक साथ जोड़ता है। आज के समय में जब ज़्यादातर फ़िल्में सिर्फ़ डर या ड्रामा तक सीमित रहती हैं। जटाधारा उन सीमाओं को तोड़ती है और ऑडियंस को कुछ नया प्रदान करती है। फिल्म कैसी है? हम आपको अपनी इस रिपोर्ट में बता रहे हैं।

Jatadhara Movie Review in Hindi

फिल्म की कहानी अनंत पद्मनाभस्वामी मंदिर के इर्द-गिर्द घूमती है। जहां सदियों पुराने रहस्य छिपे हैं। फिल्म की खासियत ये है कि इसमें इस्तेमाल किए गए तांत्रिक मंत्र और सभी रिचुअल्स को शूटिंग के दौरान सच में किया गया था। ऐसा सिनेमा जगत में नहीं किया जाता हैं। फ़िल्म की शुरुआत से ही एक अनोखा माहौल बन जाता है। मंदिर की अंधेरी गलियां, दीपक की झिलमिल रोशनी और दूर से आती मंत्रों की आवाज। श्रद्धा और डर का ये मिश्रण दर्शकों को बांधे रखता है। दोनों निर्देशकों ने इस गंभीर विषय को बेहद संवेदनशीलता और आत्मविश्वास के साथ पेश किया है।

फ़िल्म की कहानी वेंकट कल्याण ने लिखी है। फिल्म एक एक रहस्यमयी विधि, पिशाचा बंधनम्, जिसमें आत्माओं को मंदिर के छिपे खज़ाने की रक्षा के लिए बांध दिया जाता है के इर्द गिर्द घूमती है । यह विचार भारतीय पौराणिकता को आधुनिक नजरिए से जोड़ता है। साई कृष्ण करणे और श्याम बाबू मेरीगा के डायलॉग सीधे दिल को छूते हैं। सरल शब्दों में गहरी बातें फिल्म के माध्यम से कही गयी है।

सुधीर बाबू ने शिवा के किरदार में शानदार काम किया है। वह एक घोस्ट हंटर है जो केवल विज्ञान में विश्वास रखता है, पर हालात उसे ऐसी शक्तियों के सामने खड़ा कर देते हैं जिन्हें समझना मुश्किल है। उसका सफर अविश्वास से आस्था तक का है, और यही फ़िल्म की आत्मा है। सुधीर की एक्टिंग में एक संतुलन है । उनके एक्शन और इमोशनल सीन दोनों ही बेहद असरदार हैं। सोनाक्षी सिन्हा ने तेलुगु सिनेमा में धमाकेदार एंट्री की है। धन पिशाची के किरदार में वह एक ऐसी आत्मा हैं जो लालच और दर्द के बीच फंसी हुई है। उनकी स्क्रीन प्रेज़ेंस बेहद प्रभावशाली है। जब वह दिव्य राक्षसी रूप में आती हैं, तो दृश्य इतना शक्तिशाली है कि आप नज़रें नहीं हटा पाते। वो सीन डरावना भी है और खूबसूरत भी.

दिव्या खोसला अपने किरदार सितारा में सादगी और आकर्षण लाती हैं। शिल्पा शिरोडकर और इंदिरा कृष्णा कहानी को भावनात्मक गहराई देती हैं। वहीं राजीव कनकाला, रवि प्रकाश, और सुभालेखा सुधाकर जैसे कलाकार कहानी को ख़ूबसूरती से जोड़ कर रखते हैं। फिल्म के एक्शन सीन सिर्फ़ लड़ाई नहीं हैं। वे एक आध्यात्मिक रिचुअल्स जैसे लगते हैं। सुधीर बाबू के घोस्ट-हंटिंग सीन, हथियारों के कॉम्बैट और खून पीने वाले सीन को बहुत बारीकी से किया गया है ।

समीर कल्याणी का कैमरा वर्क फ़िल्म की आत्मा है। मंदिर की बनावट, दीपों की रोशनी, धुएं की परतें - हर फ्रेम एक पेंटिंग की तरह लगता है। विज़ुअल इफेक्ट्स भी प्रभावशाली हैं। खासकर जब धन पिशाची का रूप सामने आता है, तो दृश्य डराता भी है और मोहित भी करता है। फ़िल्म का साउंड डिज़ाइन दिल दहला देने वाला है। हर मंत्र, हर सन्नाटा कहानी में तनाव बढ़ाता है। राजीव राज का संगीत पारंपरिक रागों और इलेक्ट्रॉनिक धुनों का सुंदर संगम है। क्लाइमेक्स का बैकग्राउंड म्यूज़िक रोमांच पैदा करता है। "शिवा स्तोत्रम" और "पल्लो लटके अगेन" गानों में ऊर्जा और भक्ति दोनों झलकती हैं। कोरियोग्राफर संदीप ने ट्रेडिशनल डांस मूवमेंट्स को सिनेमाई अंदाज़ में पिरोया है - खासकर दिव्या खोसला का टेम्पल डांस बेहद खूबसूरत है।

फिल्म को ज़ी स्टूडियोज और प्रेरणा अरोड़ा ने प्रोड्यूस किया है। जो सिर्फ भूत-प्रेत की कहानी नहीं है। यह इंसान और ईश्वर के बीच की जंग है। जहां विज्ञान सवाल पूछता है और आस्था जवाब देती है। अगर आप कुछ अलग, गहरा और अर्थपूर्ण देखना चाहते हैं, तो 'जटाधारा' इस हफ्ते का सबसे बेहतरीन विकल्प है।

फिल्म- जटाधारा
निर्देशक - वेंकट कल्याण और अभिषेक जायसवाल
लेखक - वेंकट कल्याण
मुख्य कलाकार - सुधीर बाबू, सोनाक्षी सिन्हा, दिव्या खोसला, शिल्पा शिरोडकर और इंदिरा कृष्णा
रेटिंग - 3.5

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