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Bihar Chunav Phase 1 Voting: नक्सल प्रभावित भीमबांध में दो दशक बाद मतदान,उत्साह के साथ वोट डालने पहुंचे लोग

Bihar Chunav Phase 1 Voting: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण का मतदान अपने चरम पर है। वोटिंग को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। वहीं इस बार एक ऐतिहासिक पल देखने को मिला। मुंगेर के नक्सल प्रभावित भीमबांध क्षेत्र में 20 साल बाद मतदान हुआ, जहां लोगों ने उत्साह के साथ लोकतंत्र का पर्व मनाया।

सालों तक नक्सली हिंसा और डर के कारण यहां मतदान संभव नहीं था, लेकिन अब सुरक्षा व्यवस्था और शांति बहाली के बाद ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में वोट डाला। प्रशासन ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। बूथ संख्या 310 (वन विभाग विश्रामालय) पर सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें दिखीं।

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बुजुर्ग, महिलाएं और युवा सभी अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने पहुंचे। स्थानीय लोगों ने कहा कि अब इलाके में डर नहीं, बल्कि विकास और विश्वास की लहर है।

दो दशक बाद टूटी खामोशी, वोटिंग में उमड़ा उत्साह

भीमबांध के जंगलों में बसा यह इलाका कभी नक्सल हिंसा के लिए बदनाम था। लेकिन आज का दिन अलग था - सुबह से ही ग्रामीण मतदान केंद्रों पर कतार में नजर आए। तारापुर के भीमबांध स्थित बूथ संख्या 310 (वन विभाग विश्रामालय) पर मतदाताओं की भारी भीड़ उमड़ी। इस केंद्र पर कुल 374 मतदाता हैं, जिनमें 204 पुरुष और 170 महिलाएं शामिल हैं। केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी और प्रशासन की सख्त निगरानी में मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो रहा है।

2005 के बाद नहीं हुई थी वोटिंग

स्थानीय बुजुर्ग 81 वर्षीय विशुन देव सिंह ने बताया कि, "2005 से पहले हम अपने गांव में ही मतदान करते थे, लेकिन जब एसपी केसी सुरेंद्र बाबू की हत्या हुई, उसके बाद नक्सली घटनाओं के डर से प्रशासन ने मतदान केंद्र को गांव से 20 किलोमीटर दूर कर दिया था।"

उन्होंने आगे कहा कि उस समय प्र

शासन वाहन या टमटम की व्यवस्था तो करता था, लेकिन बुजुर्गों और महिलाओं के लिए इतनी दूरी तय करना मुश्किल होता था। नतीजतन, मतदान प्रतिशत बेहद कम रह जाता था। इस बार गांव में ही बूथ बनने से लोगों में नई ऊर्जा और विश्वास लौट आया है।

स्थानीय लोगों ने जताई खुशी - अब नहीं है डर

मतदान केंद्र पर पहुंचे एक ग्रामीण ने कहा, "हम बहुत खुश हैं। 20 साल बाद यहां वोट डालना एक नए युग की शुरुआत जैसा लग रहा है। अब कोई डर नहीं है। सुरक्षा बलों के कैंप लगने के बाद से शांति है। सरकार की सुविधाएं भी मिल रही हैं - राशन, सड़क और शिक्षा सब कुछ बेहतर हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि, "पहले जंगल में रहना मुश्किल था, लेकिन अब हम शांति से रह रहे हैं। बूथ गांव में बना है, इसलिए युवा से लेकर बुजुर्ग तक सभी मतदान करने पहुंचे हैं।"

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

भीमबांध जैसे संवेदनशील इलाकों में मतदान को लेकर प्रशासन ने कोई चूक नहीं छोड़ी। केंद्रीय बलों की कई टुकड़ियां तैनात की गई हैं और वन क्षेत्र में निगरानी ड्रोन कैमरों से की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, इलाके में शांति बनाए रखने के लिए लगातार पेट्रोलिंग जारी है।

नक्सल प्रभावित इलाकों में दशकों बाद लोकतंत्र का यह उत्सव ग्रामीणों के मन में उम्मीद की नई किरण लेकर आया है। लोगों का कहना है कि अब वे अपने विकास के लिए खुद निर्णय लेना चाहते हैं। भीमबांध की यह तस्वीर बताती है कि जहां कभी बंदूक की आवाज़ गूंजती थी, वहां आज लोकतंत्र का दीप जल रहा है।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का यह पहला चरण सिर्फ वोटिंग नहीं, बल्कि लोकतंत्र की पुनर्स्थापना का प्रतीक बन गया है। भीमबांध के मतदाताओं ने यह साबित कर दिया कि डर पर लोकतंत्र की जीत हमेशा होती है।

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