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MP भोपाल को मिली नई सौगात, यहां बनने जा रहा हैं सिक्सलेन फ्लाइओवर, जानिए 28 करोड़ की लागत, डिजाइन व पूरा प्लान

Bhopal flyover News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को 'वर्ल्ड क्लास सिटी' बनाने के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ा है। सोमवार (3 नवंबर 2025) को सुखीसेवनिया चौराहे पर 28 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले सिक्सलेन फ्लाइओवर का भूमिपूजन संपन्न हुआ। इस समारोह में भोपाल के प्रभारी मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप और हुजूर विधानसभा के विधायक रामेश्वर शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) द्वारा विकसित इस परियोजना से भोपाल-विदिशा रोड पर ट्रैफिक जाम की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। लगभग 700 मीटर लंबे इस फ्लाइओवर के दोनों ओर एक-एक किलोमीटर लंबी सर्विस रोड भी बनेगी। निर्माण कार्य एक वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य है।

MP gets a new gift a six-lane flyover will be built at Sukhisewania with design and complete plan

आइए, जानते हैं इस बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट की पूरी डिटेल - क्यों जरूरी है, डिजाइन कैसा होगा, लागत क्या है और भोपालवासियों को क्या फायदा।

भोपाल को 'वर्ल्ड क्लास' बनाने का सपना: सीएम यादव की योजनाओं का नया अध्याय

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कई मौकों पर कहा है कि भोपाल को न केवल राजधानी, बल्कि विश्व स्तरीय शहर बनाना उनकी प्राथमिकता है। इसके तहत मेट्रो विस्तार, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर जोर दिया जा रहा है। सुखीसेवनिया सिक्सलेन फ्लाइओवर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भूमिपूजन समारोह में प्रभारी मंत्री चैतन्य काश्यप ने कहा, "यह फ्लाइओवर भोपाल के विकास का प्रतीक बनेगा। ट्रैफिक मैनेजमेंट से शहर की गति तेज होगी।" वहीं, विधायक रामेश्वर शर्मा ने जोर देकर कहा, "हुजूर क्षेत्र के निवासियों की लंबी मांग आज पूरी हो रही है। यह प्रोजेक्ट दुर्घटनाओं को रोकेगा और यात्रा को सुरक्षित बनाएगा।"

भूमिपूजन के दौरान स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और अधिकारियों की मौजूदगी रही। MPRDC के अधिकारियों ने बताया कि प्रोजेक्ट का टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, और निर्माण जल्द शुरू होगा। यह फ्लाइओवर भोपाल के बाहरी इलाकों को जोड़ेगा, जिससे आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।

सुखीसेवनिया चौराहा क्यों है महत्वपूर्ण? ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं का हॉटस्पॉट

सुखीसेवनिया चौराहा भोपाल का एक व्यस्ततम जंक्शन है, जो भोपाल-विदिशा हाईवे को बायपास रोड से जोड़ता है। प्रतिदिन यहां 50,000 से अधिक वाहन गुजरते हैं - स्कूल बसें, ट्रक, प्राइवेट कारें और दोपहिया। सुबह-शाम के पीक आवर्स में जाम की स्थिति आम हो जाती है, जिससे यात्रा में 30-45 मिनट का अतिरिक्त समय लग जाता है।

ट्रैफिक का दबाव: भोपाल के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित यह चौराहा कोलार, होशंगाबाद रोड और विदिशा की ओर जाने वाले वाहनों का केंद्र है। बढ़ते शहरीकरण से वाहनों की संख्या में 20% वार्षिक वृद्धि हुई है।
दुर्घटनाओं का खतरा: पिछले दो वर्षों में यहां 50 से अधिक दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 15 मौतें शामिल हैं। सिग्नल सिस्टम और सड़क चौड़ाई की कमी मुख्य कारण हैं।

आर्थिक प्रभाव: जाम से ईंधन की बर्बादी और समय की हानि से सालाना 100 करोड़ रुपये का नुकसान अनुमानित है। MPRDC के अनुसार, फ्लाइओवर बनने से ट्रैफिक फ्लो 70% सुधरेगा। यह प्रोजेक्ट भोपाल मास्टर प्लान 2031 का हिस्सा है, जो शहर को डी-कंजेस्ट करने पर फोकस करता है।

फ्लाइओवर का डिजाइन: सिक्सलेन, 700 मीटर लंबा, सर्विस रोड के साथ - कैसी बनेगी सुविधा

यह फ्लाइओवर आधुनिक इंजीनियरिंग का नमूना होगा। मुख्य विशेषताएं:

  • लंबाई और चौड़ाई: लगभग 700 मीटर लंबा, छह लेन (तीन-तीन दोनों दिशाओं में)। ऊंचाई 8-10 मीटर, ताकि भारी वाहन आसानी से गुजर सकें।
  • सर्विस रोड: फ्लाइओवर के दोनों ओर 1 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड बनेगी, जो लोकल ट्रैफिक को हैंडल करेगी। इससे चौराहे पर सिग्नल की जरूरत खत्म हो जाएगी।
  • सुरक्षा फीचर्स: एलईडी लाइटिंग, सीसीटीवी कैमरे, रोड सेफ्टी बैरियर और इमरजेंसी कॉल बॉक्स। पैदल यात्री के लिए फुट ओवर ब्रिज भी शामिल।
  • पर्यावरण संरक्षण: ग्रीन बेल्ट, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और सोलर पैनल से बिजली। निर्माण में लोकल मटेरियल का इस्तेमाल।
  • डिजाइन हाइलाइट्स: कर्व्ड स्ट्रक्चर से सुंदर लुक, जो भोपाल की झीलों वाली वादियों से मेल खाएगा। यह डबल डेकर नहीं, लेकिन सिंगल लेवल सिक्सलेन होगा, जो स्पीड को 80 किमी/घंटा तक बढ़ाएगा।

MPRDC के इंजीनियर ने बताया, "डिजाइन में सॉफ्टवेयर सिमुलेशन से ट्रैफिक पैटर्न स्टडी की गई। यह फ्लाइओवर भोपाल के अन्य प्रोजेक्ट्स जैसे अशोका गार्डन फ्लाइओवर से इंस्पायर्ड है।" लागत और निर्माण प्लान: 28 करोड़ का बजट, एक साल में पूरा - कैसे होगा काम

परियोजना की कुल लागत 28 करोड़ रुपये है, जो राज्य बजट 2025-26 से वित्त पोषित होगी। ब्रेकडाउन:

  • मुख्य निर्माण: 18 करोड़ (कंक्रीट, स्टील, ब्रिजिंग)।
  • सर्विस रोड और एक्सेस: 6 करोड़।
  • सुरक्षा और यूटिलिटीज: 4 करोड़।

निर्माण कार्य MPRDC द्वारा टेंडर के जरिए किसी प्रमुख कंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंपा जाएगा। समयसीमा:

  • फेज 1 (0-3 महीने): साइट क्लियरिंग, पिलर्स डालना।
  • फेज 2 (3-8 महीने): डेक स्लैब, रोड लेयरिंग।
  • फेज 3 (8-12 महीने): फिनिशिंग, टेस्टिंग और उद्घाटन।
  • लक्ष्य: नवंबर 2026 तक चालू।
  • ट्रैफिक डायवर्जन प्लान के तहत निर्माण के दौरान वैकल्पिक रूट्स जैसे कोलार बायपास का इस्तेमाल होगा। MPRDC ने पर्यावरण क्लियरेंस ले लिया है।
  • भोपालवासियों को क्या फायदा? ट्रैफिक राहत से आर्थिक उछाल
  • यह फ्लाइओवर भोपाल के 5 लाख से अधिक निवासियों को प्रभावित करेगा:
  • समय की बचत: विदिशा जाने वाली यात्रा 30 मिनट कम।

सुरक्षा: दुर्घटनाएं 60% घटेंगी।

  • आर्थिक लाभ: इंडस्ट्रियल एरिया (महात्रे औद्योगिक क्षेत्र) से कनेक्टिविटी बढ़ेगी, जिससे रोजगार सृजन।
  • पर्यावरण: कम जाम से पॉल्यूशन 20% कम।

स्थानीय व्यापारी ने कहा, "चौराहे पर जाम से कारोबार प्रभावित होता था। अब आसानी होगी।" विधायक शर्मा ने वादा किया, "और फ्लाइओवर प्रोजेक्ट्स जल्द।"

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