Gayatri Jayanti 2026: कब है गायत्री जयंती? कैसे करें पूजा? जानें 10 जरूरी सवालों के जवाब
Gayatri Jayanti 2026 Kab Hai: सनातन धर्म में गायत्री जयंती का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन मां गायत्री का अवतरण हुआ था। काशी के पंडित दयानंद शास्त्री ने कहा कि 'मां गायत्री को वेदों की जननी और ज्ञान, बुद्धि और आध्यात्मिक शक्ति की देवी कहा जाता है।
माना जाता है कि गायत्री मंत्र का जप करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। गायत्री जयंती के अवसर पर श्रद्धालु व्रत रखते हैं, विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और गायत्री मंत्र का जाप करते हैं। इस दिन की गई साधना और उपासना कई गुना अधिक फलदायी होती है, इस बार ये 25 जून को आ रही है।'

गायत्री जयंती पूजा विधि
प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। पूजा स्थल को साफ करके मां गायत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।दीपक जलाएं और धूप-अगरबत्ती अर्पित करें।लाल या पीले रंग के पुष्प अर्पित करें।मां गायत्री को फल, मिठाई और नैवेद्य अर्पित करें।गायत्री मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।गायत्री चालीसा और आरती का पाठ करें।अंत में परिवार की सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की प्रार्थना करें।जरूरतमंद लोगों को दान-दक्षिणा दें। दिनभर सात्विक आहार और सदाचार का पालन करें।
गायत्री मंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः।तत्सवितुर्वरेण्यं।भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥
गायत्री जयंती पर क्या करें?
गायत्री मंत्र का नियमित जाप करें।सूर्य देव को अर्घ्य दें। गरीबों को अन्न और वस्त्र दान करें। धर्म ग्रंथों का अध्ययन करें। सकारात्मक विचारों और सदाचार का पालन करें।
| पूजा सामग्री और साधन | धार्मिक एवं व्यावहारिक महत्व |
|---|---|
| पीले और लाल पुष्प | मां गायत्री को अत्यंत प्रिय, ज्ञान और सात्विकता को दर्शाते हैं। |
| चंदन अथवा तुलसी की माला | मन को स्थिर रखने और मंत्र जप की गिनती सुनिश्चित करने के लिए सर्वोत्तम। |
| अक्षत और रोली | पूजन की पूर्णता और नव ऊंचाइयों को छूने की सात्विक कामना का प्रतीक। |
| सात्विक मिष्ठान्न व पंचामृत | भोग स्वरूप समर्पित कर प्रसाद वितरण से समाज में मिठास फैलती है। |
गायत्री जयंती का महत्व
दयानंद शास्त्री ने कहा कि 'गायत्री जयंती का यह पावन पर्व संपूर्ण मानव जाति को अंधकारमय अज्ञानता से प्रकाशमय ज्ञान की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। मां वेदमाता की निष्काम आराधना से न केवल व्यक्ति का आंतरिक शुद्धिकरण होता है, बल्कि पूरे परिवार में सकारात्मकता और सुख-शांति का वातावरण निर्मित होता है। श्रद्धा के साथ मनाया गया यह पर्व जीवन में नई स्फूर्ति, उत्तम स्वास्थ्य और असीम मानसिक शांति का संचार करता है।'
Gayatri Jayanti FAQ
- गायत्री जयंती क्यों मनाई जाती है?
- मां गायत्री के पृथ्वी पर अवतरण दिवस के रूप में यह पर्व मनाया जाता है।
- मां गायत्री कौन हैं?
- मां गायत्री को वेदमाता और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है।
- गायत्री मंत्र का क्या महत्व है?
- यह मंत्र बुद्धि, विवेक, आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति प्रदान करने वाला माना जाता है।
- गायत्री जयंती पर कितनी बार मंत्र जाप करना चाहिए?
- कम से कम 108 बार गायत्री मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।
- क्या गायत्री जयंती पर व्रत रखा जाता है?
- हां, कई श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर पूजा-पाठ करते हैं।
- गायत्री जयंती पर दान का क्या महत्व है?
- दान-पुण्य करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और समाज सेवा का भाव बढ़ता है।
- क्या महिलाएं गायत्री मंत्र का जाप कर सकती हैं?
- हां, महिलाएं और पुरुष दोनों श्रद्धापूर्वक गायत्री मंत्र का जाप कर सकते हैं।
- गायत्री जयंती पर कौन सा रंग शुभ माना जाता है?
- पीला, लाल और सफेद रंग शुभ माने जाते हैं।
- क्या घर पर गायत्री जयंती की पूजा की जा सकती है?
- हां, विधिपूर्वक घर पर भी मां गायत्री की पूजा की जा सकती है।
- गायत्री जयंती से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
- धार्मिक मान्यता के अनुसार ज्ञान, मानसिक शांति, आत्मबल, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है।














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