Sita Jakhala Temple: असम के इस मंदिर का रामायण से है गहरा संबंध, यहां माता सीता के साथ नहीं विराजते श्री राम
Sita Jakhala Temple, Assam: अयोध्या में कल यानी 22 जनवरी को राम मंदिर में भगवान राम के बाल रुप की प्रतीमा की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इस बीच देशभर में स्थित श्री राम और उनसे जुड़े मंदिरों के बारे में हम आपको बता रहे हैं। आज इस कड़ी में हम आपके लिए लाए हैं एक ऐसे मंदिर से जुड़ी जानकारी जिसके बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं।
इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना से ताल्लुक रखने वाला यह मंदिर आज गुमनामी में है। ये मंदिर है भगवान राम की पत्नी माता सीता के जीवनकाल से जुड़ा। जब माता सीता वन में अपने दोनों बच्चों के साथ एक गुमनामी की जिंदगी बीतने को मजबूर थीं। यह मंदिर आसाम के मोरीगांव में स्थित है। इसका नाम है सीताजाखाला मंदिर।

असमिया भाषा में जाखाला सीढ़ियों को कहते हैं। पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार जब धोबी की बातें सुनकर भगवान राम ने अपनी गर्भवती पत्नी माता सीता को अयोध्या से निकाल दिया था तब लक्ष्मण माता सीता को इसी स्थान पर छोड़ कर गए थे। यहां आज एक छोटी सी नदी है मान्यताओं के अनुसार पैराणिक काल में यह एक विशाल नदी हुआ करती थी और उसके सामने की पहाड़ियों पर महर्षि वाल्मीकि का आश्रम हुआ करता था।
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माता सीता ने इन्हीं पहाड़ियों पर अपनी गर्भावस्था का समय बिताया था और यहीं उन्होंने अपने दोनों बच्चों लव-कुश को जन्म दिया था और उनका पालन पोषण किया। कहा जाता है कि आज जहां सीताजाखाला मंदिर है वहां माता सीता की कुटिया हुआ करती थी और वो सीढ़ियों से उतर कर सामने वाली नदी से पानी भरने जाती थी।

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वहीं पहाड़ियों के ऊपर महर्षि वाल्मीकि का निवास स्थान हुआ करता था जिसके अवशेष आज भी वहां मौजूद हैं। ये इलाका जंगलों के बीच है और सीताजाखाला मंदिर एक छोटा सा मंदिर है जिसमें लव-कुश की प्रतिमा शिलाओं के रूप में स्थापित हैं। साथ ही वहां माता सीता की कथाओं से जुड़े कुछ और शिलाचिन्ह मौजूद हैं। ज्यादा बड़ा मंदिर ना होने के कारण इस स्थान के बारे में काफी कम लोग जानते हैं।
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