कौन बनेगा कर्नाटक में डिप्टी CM? किस जाति पर होगा फोकस, कांग्रेस हाईकमान के टेबल पर अब क्या है नया फॉर्मूला
Karnataka Deputy CM Formula: कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद अब सरकार बनाने की स्क्रिप्ट अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। डीके शिवकुमार का मुख्यमंत्री बनना तय हो चुका है और राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने उन्हें सरकार बनाने का न्योता भी दे दिया है। बेंगलुरु के लोक भवन में 3 जून को शपथ ग्रहण समारोह होना है। लेकिन असली सस्पेंस इस बात पर बना हुआ है कि नई सरकार का ढांचा कैसा होगा। डिप्टी सीएम कौन बनेगा और किसे कौन सा मंत्रालय मिलेगा?
इसी सस्पेंस को खत्म करने और कैबिनेट के चेहरों पर अंतिम मुहर लगाने के लिए मुख्यमंत्री बनने जा रहे डीके शिवकुमार और वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया अचानक एक साथ बेंगलुरु से दिल्ली पहुंच चुके हैं। कांग्रेस आलाकमान के दफ्तर में बैठकों का दौर शुरू हो चुका है, जहां कर्नाटक की सत्ता का पूरा समीकरण तय किया जा रहा है।

▶️दिल्ली में महामंथन और कैबिनेट का नया फॉर्मूला
सोमवार (01 जून) को दिल्ली पहुंचे डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के साथ सिद्धारमैया के बेटे और एमएलसी यतींद्र सिद्धारमैया भी इस दौरे पर नजर आए हैं। इसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हैं कि यतींद्र को भी नई सरकार में कोई बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है। इस दिल्ली दौरे का मुख्य मकसद कैबिनेट मंत्रियों के नामों को फाइनल करना और अलग-अलग गुटों के बीच विभागों का बंटवारा करना है।
सिद्धारमैया ने सरकार के कामकाज को बेहतर तरीके से चलाने के लिए राज्य में एक 'कोऑर्डिनेशन कमेटी' (समन्वय समिति) बनाने का सुझाव भी दिया है। हालांकि, कांग्रेस आलाकमान ने अभी तक इस प्रस्ताव को हरी झंडी नहीं दी है। इस समय दिल्ली में बैठे कांग्रेस के शीर्ष नेता सभी पक्षों को संतुष्ट करने के लिए एक ऐसे फॉर्मूले पर काम कर रहे हैं, जिससे सरकार के भीतर किसी भी तरह का असंतोष पैदा न हो।
▶️मल्लिकार्जुन खड़गे ने दिए साफ संकेत
इस पूरे सियासी घटनाक्रम और लॉबिंग के बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्थिति को थोड़ा स्पष्ट किया है। कलबुर्गी में मीडिया से बात करते हुए खड़गे ने कहा कि कैबिनेट के आकार या डिप्टी सीएम के पदों को लेकर अभी तक कोई भी अंतिम और औपचारिक प्रस्ताव उनके पास नहीं पहुंचा है। खड़गे का कहना है कि जब कर्नाटक के नेता अपनी तरफ से मंत्रियों की लिस्ट और प्रस्ताव सौंपेंगे, तभी आलाकमान उस पर बैठकर चर्चा करेगा।
उन्होंने इस बात के भी साफ संकेत दिए हैं कि कैबिनेट का गठन एक बार में न होकर अलग-अलग चरणों में किया जा सकता है। शुरुआत में 8 या 10 मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है, जिसके बाद आने वाले समय में मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाएगा। खड़गे के इस बयान से साफ है कि कांग्रेस नेतृत्व जल्दबाजी में कोई भी कदम नहीं उठाना चाहता और फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है।

▶️जातिगत समीकरण साधने की बड़ी चुनौती
कर्नाटक कांग्रेस में इस समय मंत्रियों की कुर्सी और डिप्टी सीएम पद को लेकर जबरदस्त अंदरूनी खींचतान और लॉबिंग चल रही है। राज्य के अलग-अलग जिलों, जातियों और समुदायों के नेता अपने-अपने समाज के लिए बड़ी हिस्सेदारी मांग रहे हैं। इस सामाजिक संतुलन को बैठाना आलाकमान के लिए सबसे सिरदर्दी वाला काम साबित हो रहा है:
- लिंगायत समुदाय की मांग: वरिष्ठ कांग्रेस नेता एमबी पाटिल के समर्थकों ने मांग उठाई है कि वीरशैव-लिंगायत समुदाय को साधने के लिए या तो उन्हें प्रदेश अध्यक्ष (KPCC) की कुर्सी दी जाए या फिर डिप्टी सीएम का पद सौंपा जाए।
- दलित और वोक्कालिगा समाज: कोलार जिले के कांग्रेस नेताओं ने डीके शिवकुमार से मुलाकात कर अनुसूचित जाति (SC), वोक्कालिगा और अन्य क्षेत्रीय समुदायों को मंत्रिमंडल में मजबूत प्रतिनिधित्व देने की मांग की है।
- सोशल जस्टिस का फॉर्मूला: पूर्व मंत्री सतीश जारकीहोली और राज्यसभा सांसद नसीर हुसैन ने भी साफ किया है कि पार्टी का पूरा ध्यान सोशल जस्टिस (सामाजिक न्याय), जातिगत समीकरण और क्षेत्रीय संतुलन को बनाए रखने पर है। इसी आधार पर मंत्रियों की संख्या तय होगी।
▶️नए प्रदेश अध्यक्ष की रेस भी हुई तेज
चूंकि डीके शिवकुमार अब मुख्यमंत्री की कमान संभालने जा रहे हैं, इसलिए 'एक व्यक्ति, एक पद' के सिद्धांत के तहत कांग्रेस को कर्नाटक में नया प्रदेश अध्यक्ष (KPCC Chief) चुनना होगा। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बिठाने के लिए किसी ओबीसी (OBC) नेता को यह जिम्मेदारी देने पर विचार कर रही है।
यह बदलाव इसलिए भी बहुत जरूरी है क्योंकि पार्टी का अगला लक्ष्य साल 2028 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए जमीन मजबूत करना है। इसी सिलसिले में अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए शरण प्रकाश पाटिल, राघवेंद्र हितनाल और बसनागौडा दद्देश जैसे कई बड़े कांग्रेस विधायक भी दिल्ली का रुख कर चुके हैं और आलाकमान के सामने अपनी बात रखने की कोशिश कर रहे हैं।
▶️सिद्धारमैया की नई भूमिका पर टिकीं नजरें
डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद अब हर किसी के मन में यह सवाल उठ रहा है कि राज्य के सबसे कद्दावर नेताओं में से एक सिद्धारमैया की भूमिका क्या होगी? इस सस्पेंस पर से पर्दा उठाते हुए कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन ने बताया कि सिद्धारमैया हमेशा से ही राज्य की राजनीति में गहरी रुचि रखते रहे हैं और उन्होंने कभी भी राष्ट्रीय राजनीति का रुख करने के बारे में नहीं सोचा है।
सिद्धारमैया नई सरकार और संगठन को दिशा दिखाने में एक मार्गदर्शक और संरक्षक के रूप में बेहद सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिद्धारमैया का राज्य की राजनीति में एक्टिव रहना नई नवेली कांग्रेस सरकार के लिए एक बड़े सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा। अब देखना यह है कि 3 जून के शपथ ग्रहण से पहले दिल्ली के इस महामंथन से क्या अमृत निकलकर बाहर आता है।















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