Women Reservation: पटनायक सरकार का वो प्रस्ताव, जिसका 5 साल पहले संयुक्त राष्ट्र ने किया था स्वागत

Women Reservation Bill: केंद्र सरकार ने संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण विधेयक का प्रस्ताव चर्चा के लिए सदन के पटल पर रखा, जिसका सभी दलों ने स्वागत किया है। ये ऐसा बिल है, जिसकी वर्षों से मांग थी। इस बिल का प्रस्ताव यूपीए सरकार से समय से से लंबित था। विधेयक में प्रावधान है कि लोकसभा दिल्ली विधानसभा और सभी राज्यों के विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मिलेगी। यानी महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित होंगी।

ऐतिहासिक बिल के बाद महिलाओं की सक्रिय राजनीति में हिस्सेदारी बढ़ जाएगी। लेकिन ये पहला मौका नहीं था, जब केंद्र में इस तरह के प्रस्ताव आया। इससे पहले ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक ने महिलाओं के आरक्षण को लेकर ओडिशा विधानसभा में ऐसा ही एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसकी संयुक्त राष्ट्र ने भी सराहना की थी।

Patnaik govt for Women Reservation

नए संसद भवन में विशेष सत्र (Parliament Special Session) के दूसरे दिन महिलाओं से जुड़ा ऐतिहासिक बिल केंद्र सरकार की ओर पेश किया गया। ये बिल (Women Reservation Bill) केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने पेश किया। ये विधेयक कानून में बदलते ही सदन में महिलाओं की 33 प्रतिशत अनिवार्यता निश्चित हो जाएगी। वास्तव में ये वही निर्णय है, जिस पर ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक ने पांच साल पहले ही विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया था। दरअसल, बीजेडी महिलाओं को राजनीति में प्रमुखता से लाने के लिए लगातार प्रयासरत है। ओडिशा विधानसभा में महिला आरक्षण पर प्रस्ताव लाकर सीएम पटनायक ना केवल महिलाओं के अधिकारों की वकालत की बल्कि उन्होंने अपने प्रदेश में इसे प्रमुखता से लागू भी किया।

दरअसल, वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने विधानसभाओं और संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग करते हुए ओडिशा विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया था। ठउस वक्त सीएम नवीन ने अपने बयान में कहा, "विधानसभाओं और संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने के इस ऐतिहासिक प्रस्ताव पर चर्चा शुरू करना बेहद आवश्यक है। यही वजह है कि सदन में इस प्रस्ताव को लाने की आवश्यकता हुई।" इसके बाद अगले वर्ष सीएम पटनायक ने 2019 के आम चुनाव में बीजू जनता दल ने 33 फीसदी महिला उम्मीदवारों को टिकट देकर इसे व्यावहारिक बना दिया था।

सीएम पटनायक के इस निर्णय की संयुक्त राष्ट्र ने संसद और राज्य विधानसभाओं में सराहना की थी। संयुक्त राष्ट्र महिला की उप-देश प्रतिनिधि निष्ठा सत्यम ने अपने बयान में कहा, "हमें खुशी है कि ओडिशा सरकार ने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव करके नेतृत्व का प्रदर्शन किया है।" संयुक्त राष्ट्र के पत्र में कहा गया है, "हम इस तथ्य पर आपके विचार नेतृत्व और समर्थन की सराहना करते हैं कि महिलाएं आर्थिक और सामाजिक प्रगति तभी कायम रह सकती है, जब आधी आबादी की राज्यों और देश के सर्वोच्च निर्णय लेने वाले निकायों में भूमिका हो।"

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