तेलंगाना और महाराष्ट्र के 14 गांवों का विवाद, मालिकाना हक पर SC तक लड़ाई, पिस रहे ग्रामीणों ने क्या कहा ?
तेलंगाना और महाराष्ट्र की सीमाओं पर कई गांव ऐसे हैं, जहां के निवासियों को पता नहीं है कि वे किस राज्य के निवासी हैं। कन्फ्यूजन के बीच 12 गांवों के लोगों ने कहा, जिस राज्य में खेती की जमीन मिलेगी वहीं के निवासी बनेंगे।

सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों को किस राज्य का निवासी माना जाए ? इस सवाल का जवाब कई बार पेचीदा होता है। यही हाल तेलंगाना और महाराष्ट्र के करीब दर्जनभर गांवों में रहने वाले लोगों का है। तेलंगाना में कुमुरम भीम आसिफाबाद और महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के लगभग दर्जनभर गांव के लोगों ने कहा है कि वे उसी राज्य के निवासी बनेंगे जहां उन्हें उनकी कृषि भूमि के लिए पट्टा मिलेगा।
दरअसल, भले ही इन 12 गांवों में रहने वाले ग्रामीण बिजली सब्सिडी और छोटी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं, लेकिन पट्टे के अभाव में उन्हें तेलंगाना सरकार की रायथु बंधु, रायथु भीमा और अन्य किसान कल्याण कार्यक्रमों जैसी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। रिपोर्ट के मुताहिक सभी गांव चार ग्राम पंचायतों- परंधोली, अथापुर, मुकाधमगुडा और बोल्लापातर के अंतर्गत आते हैं।
दी न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक परंधोली के पूर्व सरपंच कांबले लक्ष्मण ने कहा कि तेलंगाना और महाराष्ट्र देश की सबसे बड़ी अदालत तक जा चुके हैं। दोनों राज्य सुप्रीम कोर्ट में लगभग 12 गांवों पर अपना दावा ठोक रहे हैं। इसी बीच इन गांवों के निवासियों ने शिकायत की कि दोनों राज्यों के बीच विवाद के कारण उनके गांवों के विकास प्रभावित हो रहे हैं।












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