'संबाद' का स्टाफ ऋण धोखाधड़ी मामले की जांच में नहीं कर रहा सहयोग: ईओडब्ल्यू

ओडिशा पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने संबाद से जुड़े ऋण धोखाधड़ी मामले में अधिकारियों पर बड़े आरोप लगाए हैं। ईओडब्ल्यू ने कहा है कि सांबाद/ईएमएल के पीड़ित कर्मचारियों से पूछताछ की गई है और उन्होंने आरोपों की पुष्टि भी की है। लेकिन आगे की पूछताछ में संबाद के अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे हैं। दरअसल, ईस्टर्न मीडिया लिमिटेड (ईएमएल) को आपराधिक धमकी, धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में संबाद के खिलाफ ईओडब्ल्यू जांज कर रही है।

मामले में जांच कर रही एजेंसी ने प्रेस नोट में कहा, "ईओडब्ल्यू की एक टीम ने सांबाद के कार्यालय में तलाशी ली, जिसमें संबाद के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सहयोग नहीं किया। संबाद के दफ्तर से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब मिले। सांबाद के अधिकारियों ने कुछ संदिग्ध फाइलें ईओडब्ल्यू टीम को सौंपने से इनकार कर दिया। ईओडब्ल्यू टीम खातों और एचआर अनुभागों की कुछ प्रासंगिक कंप्यूटर फ़ाइलों की प्रतिलिपि भी बनाना चाहती थी लेकिन उन्हें मना कर दिया गया। इस स्थिति में ईओडब्ल्यू टीम को कुछ हार्ड डिस्क जब्त करने के लिए मजबूर होना पड़ा।"

Sambad staff not cooperating EOW

बता दें कि ईओडब्ल्यू ने ये कार्रवाई खंडपाड़ा विधायक सौम्य रंजन पाठक के ओड़िया दैनिक संबाद के दफ्तर पर की, जिन्हें एक अब बीजेडी ने पार्टी से निष्कासित कर दिया है। संबाद पर कार्रवाई को लेकर जांच एजेंसी के एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि करोड़ों रुपये की ऋण राशि कर्मचारियों को नहीं दी गयी, बल्कि कथित तौर पर उनकी नियोक्ता कंपनी 'ईस्टर्न मीडिया लिमिटेड भुवनेश्वर' द्वारा इस्तेमाल की गई। संबाद/ईस्टर्न मीडिया लिमिटेड भुवनेश्वर के पूर्व कर्मचारी असीम महापात्र की शिकायत के बाद बैजयंती कर (एचआर मैनेजर), सौम्य रंजन पटनायक (संपादक) और अन्य के खिलाफ इस साल 16 सितंबर को मामला दर्ज किया गया था।

ओडिशा पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120-बी (साजिश) सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज करने के बाद इओडब्ल्यू की अलग-अलग टीमों ने छापेमारी कर ओड़िया दैनिक 'संबाद' के कार्यालय से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए थे।

विधायक ने अपनी शिकायत में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक धमकी सहित बैंक ऋण धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाये हैं। अधिकारियों ने कहा कि आरोपियों ने कथित तौर पर महापात्र की इच्छा और भुगतान क्षमता के खिलाफ उसे बैंक ऋण से संबंधित फॉर्म पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया था।

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