उत्तराखंड में धामी सरकार की कर्मचारियों को बड़ी राहत, इस वर्ष 15% कर्मचारियों के होंगे अनिवार्य तबादले
उत्तराखंड में वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम 2017 के प्रावधानों में ढील देते हुए गंभीर रूप से बीमार के लिए कुछ छूट भी दी गई है। कुछ मामलों में 15 प्रतिशत की सीमा से बाहर जाकर भी तबादले हो सकेंगे।

उत्तराखंड में धामी सरकार ने राज्य कर्मचारियों को बड़ी सौगात देते हुए वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम 2017 के प्रावधानों में ढील देते हुए गंभीर रूप से बीमार के लिए कुछ छूट भी दी गई है। गंभीर रूप से विकलांगता व जिनके बच्चे मानसिक रोगी हैं या सेवारत पति-पत्नी जिनकी इकलौती संतान विकलांग है, के मामलों में अनुरोध के आधार पर 15 प्रतिशत की सीमा से बाहर जाकर भी तबादले हो सकेंगे।
गृह जिलों में स्थानांतरित किया जा सकेगा
इंजीनियरिंग सेवा में अधिशासी अभियंता से लेकर कनिष्ठ अभियंता तक को उनके गृह जिलों में स्थानांतरित किया जा सकेगा। लेकिन उन्हें अपने गृह सर्किल व खंड में तैनाती नहीं मिलेगी। उच्च शिक्षा व विद्यालीय विभाग में शैक्षणिक सत्र के मध्य में स्वास्थ्य कारणों व छात्रों को अनवरत शिक्षा सुलभ कराने के उद्देश्य से तबादलों में छूट प्रदान की गई है। अपर सचिव कार्मिक एवं सतर्कता ललित मोहन रयाल ने इस संबंध में अलग अलग शासनादेश जारी किए। संवर्ग परिवर्तन या संवर्ग से बाहर स्थानांतरण के उन मामलों को धारा-27 के तहत गठित समिति के समक्ष नहीं लाए जा सकेंगे, जिनका तबादला अधिनियम में प्रावधान नहीं है।
इन तीन श्रेणियों में 15 फीसदी से भी अधिक तबादले
1. तबादला एक्ट की धारा17 (1) ख की श्रेणी एक, दो व तीन में आने वाले कर्मचारियों के अनुरोध के आधार पर स्थानांतरण की अधिकतम सीमा से ज्यादा तबादले हो सकेंगे। यानी यह छूट गंभीर रूप से रोगग्रस्त विकलांग कर्मचारी द्वारा स्वयं अथवा पति-पत्नी की गंभीर रोगग्रस्तता या विकलांगता के आधार पर।
2. मानसिक रूप से विक्षिप्त एवं लाचार बच्चों के माता-पिता।
3. सेवारत पति-पत्नी जिनका इकलौता पुत्र या पुत्री विकलांग हो।












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