CM मान की सख्ती: जालंधर में 10 महीनों में 410 ड्रग्स तस्कर गिरफ्तार, 322 मामले दर्ज, तस्करों की प्रोपर्टी जब्त
पंजाब की भगवंत मान सरकार के कार्यकाल में ड्रग्स तथा कानून व्यवस्था सबसे बड़ा सवाल था। लेकिन सरकार ने इन दोनों ही मुद्दों पर खुद को साबित करने में कोई कमी नहीं छोड़ी है।
बात जालंधर की करें तो जनवरी 2023 में जालंधर में पुलिस कमिश्नर के पद पर तैनात हुए आईपीएस अधिकारी कुलदीप चाहल ने शहर में कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए हरसंभव प्रयास किया है।

यह बात हम नहीं कहते, बल्कि पुलिस विभाग के आंकड़े साबित करते हैं कि किस तरह से कमिश्नर चाहल के नेतृत्व में जिला पुलिस ने ड्रग्स के खिलाफ बड़ी सफलताएं हासिल की हैं।
322 मामले और 410 आरोपी काबू
जनवरी 2023 से अक्तूबर तक जालंधर कमिश्नरेट पुलिस ने ड्रग्स पर अंकुश लगाने के लिए बड़े स्तर पर कार्रवाई की है, जिसके बाद जिले में ड्रग्स को लेकर कुछ हद तक लगाम लगने लगी है। आंकड़ों के अनुसार एन.डी.पी.एस. एक्ट के तहत कमिश्नरेट पुलिस ने इन 10 महीनों में 322 मामले दर्ज किए हैं और 410 आरोपियों को काबू किया है। इनमें 40 वे आरोपी हैं, जो ड्रग्स की तस्करी में बड़े स्तर पर शामिल थे। इसके अलावा कमिश्नरेट पुलिस ने अलग-अलग एन.डी.पी.एस. के मामलों में भगौड़े हुए 23 लोगों को भी अरैस्ट किया है।
10 महीनों में बड़ी रिकवरी
आंकड़ों के अनुसार कमिश्नरेट पुलिस ने इन 10 महीनों में करीब 25 किलो अफीम जब्त की है, जो एक बड़ी रिकवरी है जबकि पुलिस की तरफ से 13 किलो हेरोइन भी बरामद कर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा चूरा-पोस्त की बड़ी खेप इन 10 महीनों में पुलिस ने जब्त की है। पुलिस को करीब 448 किलो चूरा पोस्त जब्त करने में सफलता मिली। इसके अलावा पुलिस ने 31 किलो गांजा, करीब अढ़ाई किलो नशीला पाऊडर, इंजैक्शन, नशीली दवाइयां जब्त की है।
ड्रग्स फैलाने वालों की प्रापर्टी जब्त
इन 10 महीनों के समय में पुलिस ने ड्रग्स का कारोबार करने वालों के खिलाफ अभियान तेज किया है और इन लोगों पर सख्ती बरतते हुए राज्य सरकार के आदेशों अनुसार इनकी प्रापर्टी पर भी कब्जा लिया है। कमिश्नरेट पुलिस ने ड्रग्स के केस से संबंधित 5 लोगों की एन.डी.पी.एस. एक्ट की धारा 68 एफ के तहत 1 करोड़ 32 लाख के करीब की प्रापर्टी जब्त की है। प्रशासन की इस कार्रवाई से ड्रग्स के धंधे में लिप्त लोगों को एक सबक मिला है कि सिर्फ कुछ महीने जेल रहकर ही मामला खत्म नहीं हो जाएगा, बल्कि प्रापर्टी से भी हाथ धोना पड़ेगा।












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