US Iran Nuclear Deal: ईरान को बड़ा झटका! ट्रंप ने ठुकराया न्यूक्लियर डील का मसौदा, इन दो शर्तों पर अटकी बात

US Iran Nuclear Deal: अमेरिका और ईरान के बीच न्यूक्लियर डील आखिरी चरण में फंसी! राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एनरिच्ड यूरेनियम और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर मसौदे में कराए बड़े बदलाव। जानिए क्या हैं वो सख्त शर्तें और 60 दिन की टाइमलाइन का पूरा सच।

ट्रंप चाहते हैं कि ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम, एनरिच्ड यूरेनियम और भविष्य की मॉनिटरिंग से जुड़े नियम ज्यादा साफ और सख्त हों। व्हाइट हाउस का कहना है कि अमेरिका ऐसी ही डील स्वीकार करेगा जो ईरान को कभी न्यूक्लियर हथियार बनाने से रोक सके। इसी वजह से अंतिम समझौते में अभी कुछ और बातचीत बाकी है।

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Trump Iran Nuclear Draft: ट्रंप ने क्यों रुकवाई फाइनल डील?

अमेरिका और ईरान के बीच तैयार मसौदा लगभग पूरा माना जा रहा था, लेकिन ट्रंप कुछ शर्तों से संतुष्ट नहीं हैं। उनका मानना है कि डील में ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर कई बातें स्पष्ट तरीके से नहीं लिखी गई हैं। खास तौर पर एनरिच्ड यूरेनियम के स्टॉक और उसकी निगरानी से जुड़े मुद्दों पर ट्रंप ज्यादा स्पष्टता चाहते हैं। इसी कारण उन्होंने अधिकारियों को दस्तावेज में बदलाव करने और ईरान के साथ दोबारा बातचीत शुरू करने का निर्देश दिया है। इससे डील की प्रक्रिया कुछ दिनों के लिए आगे बढ़ सकती है।

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यूरेनियम स्टॉक बना सबसे बड़ा मुद्दा

डील में सबसे बड़ी बहस ईरान के पास मौजूद एनरिच्ड यूरेनियम को लेकर हो रही है। अमेरिका चाहता है कि यह साफ लिखा जाए कि मौजूदा स्टॉक का क्या होगा और भविष्य में ईरान कितना यूरेनियम एनरिच कर सकेगा। ट्रंप प्रशासन यह भी जानना चाहता है कि इस सामग्री को हटाने, ट्रांसफर करने या नष्ट करने की प्रक्रिया क्या होगी। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि जब तक इन सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं मिलते, तब तक किसी भी समझौते को पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता।

60 दिन की टाइमलाइन में होंगे बड़े फैसले

मौजूदा मसौदे में 60 दिन की एक विशेष टाइमलाइन रखी गई है। इस दौरान दोनों देश कई अहम मुद्दों पर बातचीत जारी रखेंगे। इनमें न्यूक्लियर एक्टिविटी की सीमा, इंटरनेशनल इंस्पेक्शन, प्रतिबंधों में राहत और भविष्य की मॉनिटरिंग शामिल है। अमेरिका चाहता है कि इस अवधि में ऐसे नियम तय किए जाएं जिनका पालन ईरान लंबे समय तक करे। विशेषज्ञों का मानना है कि यही 60 दिन डील की सफलता या विफलता तय कर सकते हैं क्योंकि इसी दौरान सबसे कठिन मुद्दों का समाधान निकालना होगा।

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होर्मुज स्ट्रेट पर भी ट्रंप की नजर

ट्रंप ने डील के उस हिस्से में भी बदलाव सुझाए हैं जो होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ा हुआ है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हाल के तनाव के दौरान इस रास्ते को लेकर कई चिंताएं सामने आई थीं। अमेरिका चाहता है कि भविष्य में इस मार्ग पर किसी तरह की रुकावट न आए और अंतरराष्ट्रीय व्यापार सामान्य बना रहे। इसलिए व्हाइट हाउस इस विषय पर भी अधिक स्पष्ट और मजबूत भाषा शामिल करने की कोशिश कर रहा है।

ईरान ने कहा- अभी फाइनल नहीं हुआ समझौता

ईरान की सरकारी मीडिया ने भी माना है कि समझौता काफी करीब पहुंच चुका है, लेकिन अभी इसे पूरी तरह फाइनल नहीं कहा जा सकता। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि डील के बाद ईरान को विदेशों में फंसी बड़ी रकम वापस मिल सकती है, हालांकि अमेरिका ने ऐसे दावों से इनकार किया है। दोनों पक्षों के बीच नए प्रस्तावों पर चर्चा जारी है। अगर ट्रंप की प्रमुख शर्तें स्वीकार कर ली जाती हैं तो आने वाले दिनों या अगले सप्ताह के भीतर इस बहुप्रतीक्षित समझौते पर अंतिम मुहर लग सकती है।

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