ओडिशा सरकार ने निजी अस्पतालों में सी-सेक्शन का ऑडिट शुरू किया
ओडिशा सरकार ने ऐसी सर्जरी की वास्तविकता की जांच के लिए निजी अस्पतालों में सिजेरियन सेक्शन डिलीवरी का ऑडिट शुरू किया है।

ओडिशा सरकार ने ऐसी सर्जरी की वास्तविकता की जांच के लिए निजी अस्पतालों में सिजेरियन सेक्शन (सी-सेक्शन) डिलीवरी का ऑडिट शुरू किया है। 2020-21 और 2021-22 के बीच प्रसवों के लिए निजी अस्पतालों में किए गए सी-सेक्शन में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। जिसके सरकार ने इन अस्पतालों का ऑडिट करना शुरु किया है।
हाल के महीनों में ऐसी कई रिपोर्ट्स आईं थीं, जिसमें कहा गया था कि, बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना (बीएसकेवाई) के लागू होने के बाद राज्य के निजी अस्पतालों में सिजेरियन सेक्शन प्रसव के मामले खतरनाक रूप से बढ़ रहे हैं। क्योंकि सूचीबद्ध अस्पताल आसानी से पैसे कमाने के लिए इस रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं।
परिवार कल्याण निदेशक डॉ बिजय पाणिग्रही ने कहा कि सरकार अनावश्यक और अत्यधिक सर्जरी पर अंकुश लगाने के लिए निजी अस्पतालों में सी-सेक्शन डिलीवरी के रिकॉर्ड को सत्यापित करने की प्रक्रिया में है। सीडीएमओ को रिकॉर्ड का निरीक्षण करने और यह निर्धारित करने के लिए कहा गया है कि क्या सीजेरियन डिलीवरी प्रक्रिया की आवश्यकता है। वे पिछले रिकॉर्ड का निरीक्षण करेंगे और मौजूदा सर्जरी पर नजर रखेंगे।
स्वास्थ्य मंत्रालय की स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) की एक रिपोर्ट ने संकेत दिए थे कि निजी अस्पतालों में सी-सेक्शन की हिस्सेदारी 64.67 प्रतिशत से बढ़कर 74.62 प्रतिशत हो गई है। 2020-22 के दौरान सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं में यह 14.77 प्रतिशत से बढ़कर 16.88 प्रतिशत तक पहुंच गई।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, निजी स्वास्थ्य सुविधाओं में सी-सेक्शन की हिस्सेदारी 2015-16 में 53.7 प्रतिशत से बढ़कर 2019-21 में 70.7 प्रतिशत हो गई थी। जो सभी बड़े स्वास्थ्य केंद्रों में सबसे अधिक थी। राज्यों में पांच साल की अवधि में सरकारी अस्पतालों में सर्जिकल प्रसव की दर 11.5 प्रतिशत से बढ़कर 15.3 प्रतिशत हो गई है।












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