लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारियों में भाजपा को किन-किन राज्यों में करना पड़ रहा है चुनौतियों का सामना
लोकसभा चुनाव 2024 की रूपरेखा तैयार करने में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों ने काफी हद तक दक्षिण भारत में भाजपा की पकड़ को कमजोर किया है।
कर्नाटक एक मात्र ऐसा राज्य था, जो भाजपा के लिए दक्षिण में अपना साम्राज्य बढ़ाने का मौका था। पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी बीजेपी की पकड़ पहले से ढीली हो गई है। लगातार जातीय हिंसा के कारण मणिपुर और मिजोरम में भी भाजपा को झटका लग सकता है। हालांकि वहां भाजपा को फायदा भी मिल सकता है।

भारत के पश्चिम में 2014 के बाद से भाजपा के लिए महाराष्ट्र एक बड़ी चुनौती है। यहां महाविकास आघाडी फिर से आगे बढ़ सकती है। शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट को अभी भी बालासाहेब ठाकरे के उत्तराधिकारी के तौर पर पैदा हुई "सहानुभूति" मिलने की उम्मीद है।
हालांकि दक्षिण, पूर्व और पश्चिम का एक बड़ा हिस्सा भाजपा के लिए उत्साहजनक होगा। लेकिन भाजपा को अपनी चुनाव की तैयारियों में उत्तर को भी ध्यान में रखना होगा।
जम्मू- कश्मीर, लद्दाख, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली भी भाजपा के लिए चुनौती भरी हो सकती है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ में भी भाजपा को मजबूत रणनीति बनानी होगी।
हालांकि फिर भी भाजपा नेताओं का दावा है कि लोकसभा चुनाव में उन्हें 300 से 350 सीटें मिलेगी। वहीं दूसरी ओर विपक्ष, चाहे वह कांग्रेस हो या क्षेत्रीय दल भाजपा को कड़ी टक्कर देने की रणनीति तलाश रहे हैं।
अब विपक्ष भी भाजाप की तरह हिंदुत्व पर जोर दे रहा है। हालांकि विपक्ष के हिंदुत्व पर जोर देने का नतीजा सकारात्मक नहीं दिख रहा है। लेकिन इसने भाजपा को हिंदुत्व की राजनीति को और भी तेज करने के लिए जरूर प्रेरित किया है।












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