खट्टर सरकार का बड़ा कदम, हरियाणा के प्राइवेट अस्‍पतालों में गरीबों को मिलेगा फ्री इलाज

अब हर‍ियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने ना केवल पॉलिसी में संशोधन किया है बल्कि उसके पालन के लिए अस्पतालों को बाध्य भी किया जाएगा।

Khattar governments big step, poor will get free treatment in private hospitals of Haryana

हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण से जिन प्राइवेट अस्पतालों ने रियायती दरों पर जमीन लेकर अस्पताल बनाए हैं, उन्हें गरीबों को फ्री या बहुत ही रियायती दरों पर इलाज की सुविधा मुहैया करवानी होगी। इसके लिए हर‍ियाणा सरकार ने पहले से बनी पॉलिसी में संशोधन क‍िया है। इसके तहत अस्पतालों के लिए पॉलिसी का पालन करना अनिवार्य कर द‍िया गया है। अब 15 हजार तक महीना कमाने वाले परिवार इस सुविधा का लाभ ले पाएंगे जबकि पहले इसकी मासीमा पांच हजार निर्धारित थी और पॉलिसी को कड़ाई से लागू भी नहीं किया जा रहा था।

अब हर‍ियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने ना केवल पॉलिसी में संशोधन किया है बल्कि उसके पालन के लिए अस्पतालों को बाध्य भी किया जाएगा। नई पॉलिसी के तहत गुरुग्राम के 3 बड़े नामी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल भी आते हैं जिनमें आर्टेमिस, फॉर्टिस और मेदांता द मेडिसिटी शामिल हैं। नई पॉलिसी को लागू करने को लेकर गुरुग्राम के डीसी निशांत कुमार यादव ने इन तीनों अस्पतालों के प्रतिनिधियों और अन्य संबंधित अधिकारियों की एक बैठक गुरुग्राम के म‍िनी सचिवालय में बुलाकर उन्हें इस पॉलिसी के बारे में बताते हुए इसे अनिवार्य रूप से लागू करने की राज्य सरकार की मंशा भी साफ कर दी है।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए डीसी यादव ने बताया कि हरियाणा प्रदेश में एचएसवीपी से रियायती दरों पर जमीन लेकर बनाए गए प्राइवेट अस्पतालों को अब गरीब परिवारों को मुफ्त या बहुत ही रियायती दरों पर इलाज की सुविधा देनी होगी। उन्होंने बताया कि सभी स्रोतों से जिस परिवार की मासिक आय 15000 तक है, वे इस सुविधा का लाभ प्राप्त करने के पात्र हैं। नई पॉलिसी की जानकारी देते हुए डीसी यादव ने बताया कि मेदांता-द मेडिसिटी जैसे सुपर स्पेशलिटी अस्पताल को अपनी कुल बेड की क्षमता के 20% बेड गरीबों के लिए आरक्षित करने होंगे।

इस श्रेणी में दाखिल हुए मरीज का यदि 5 लाख तक ब‍िल आता है तो उसका इलाज बिल्कुल फ्री होगा और यदि बिल की राशि 5 लाख से 10 लाख रुपए के बीच है तो मरीज से सामान्य चार्जिज का 10 प्रतिशत ही लिया जाएगा। यदि बिल की राशि 10 लाख से ज्यादा है, तो नॉर्मल चार्जिज का 30% ही लिया जाएगा। इन अस्पतालों में ओपीडी में आने वाले मरीजों में भी 20 प्रतिशत सेवाएं समाज के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए होनी चाहिएं।

डीसी यादव ने इन प्राइवेट अस्पतालों के प्रतिनिधियों से कहा कि वे अपने अस्पताल में गरीब परिवारों अर्थात बीपीएल, ईडब्ल्यूएस परिवारों के लिए अलग से काउंटर बनाएं और जहां मरीज को दिखाना है वहां भी इनकी लाइन अलग हो ताकि इन परिवारों से संबंधित मरीजों को अपना इलाज करवाने में कोई कठिनाई ना हो। यदि कोई बीपीएल मरीज उपलब्ध नहीं है तो गरीबों के लिए आरक्षित बेड पर सामान्य मरीज को दाखिल किया जा सकता है लेकिन जैसे ही बीपीएल या ईडब्ल्यूएस श्रेणी का कोई मरीज आएगा तो वह बेड खाली करवाना पड़ेगा। उनके लिए अस्पताल में जेनेरिक दवाओं की भी व्यवस्था हो।

इस श्रेणी के तहत मुख्यमंत्री हरियाणा, स्वास्थ्य मंत्री, सिविल सर्जन या जिला का नोडल अधिकारी, उपायुक्त और जिला रेड क्रॉस सोसाइटी के अध्यक्ष की स्वीकृति से जिला रेड क्रॉस सोसाइटी इन अस्पतालों को इलाज के लिए मरीज रेफर करेंगे। इसके अलावा, आयुष्मान भारत, चिरायु कार्ड और बीपीएल कार्ड धारक व्यक्ति सीधे भी अस्पताल में इलाज के लिए जा सकते हैं। आपात स्थिति में मरीज के इलाज को प्राथमिकता दी जाएगी और कागज कार्यवाही बाद में की जाएगी।

डीसी यादव ने बताया कि इस नई पॉलिसी की पालना के लिए एचएसवीपी की ओर से एक पोर्टल भी बनाया जा रहा है। पोर्टल बनने के बाद अस्पताल में बीपीएल या गरीब परिवार से संबंधित मरीज के दाखिल होते ही उसका विवरण पोर्टल पर अपलोड करना होगा। यहां तक कि मरीज को दिए गए फाइनल बिल की प्रति भी अस्पताल प्रबंधन को पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। मरीजों को इस श्रेणी में इलाज की सुविधा प्राप्त करने के लिए अपना बीपीएल कार्ड, आधार कार्ड, परिवार पहचान पत्र या आयुष्मान भारत कार्ड दाखिल होने के 24 घंटे के भीतर प्रस्तुत करना होगा। ऐसा नहीं करने पर मरीज को इस पॉलिसी के अंतर्गत सुविधा का पात्र नहीं माना जाएगा।

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