Khatiani Jauhar Yatra : हेमंत सोरेन ने कहा, जो राज्यपाल चाहेंगे वो नहीं, जो सरकार चाहेगी वही होगा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज सरायकेला में खतियानी जोहार के दौरान विधेयक वापस करने को लेकर राज्यपाल पर सीधा निशाना साधा है। राज्य की सरकार यहां के मूल निवासियों के भावना के आधार पर काम करेगी।

Hemant Soren

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज सरायकेला में खतियानी जोहार के दौरान विधेयक वापस करने को लेकर राज्यपाल पर सीधा निशाना साधा है। राज्य की सरकार यहां के मूल निवासियों के भावना के आधार पर काम करेगी। उन्होंने इस मंच से स्पष्ट तौर पर कहा कि जो राज्यपाल चाहेंगे वो नहीं जो सरकार चाहेगी वही होगा। हमें आज भी लोग बोका सोचते हैं। अब यही बोका लोग ठोकेगा। खतियानी जोहार यात्रा के दौरान 1932 आधारित स्थानीय नीति पर सीएम ने खुलकर बयान दिया है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, महीने भर से आधा दर्जन से अधिक जिलों में खतियानी जोहार यात्रा की। एक दर्जन से अधिक जिलों में घूमा। इस जोहार यात्रा में जिस तरह लोगों का साथ मिल रहा है।

सीएम ने कहा, मैं जब आ रहा था तो रास्ते में मैंने कई लोगों को देखा। इन लोगों के माथे पर अलग राज्य का इतिहास लिखा है। उनके चेहरे पर स्पष्ट दिखाई देगा कि कितने लोगों ने बलिदान किया, कितना संघर्ष किया। आप हाथ में नहीं गिन सकते इतने लोग शहीद हुए हैं।

मैं अखबार नहीं पढ़ता, टीवी नहीं देखता

यहां आने से पहले मैं राज्यपाल के साथ था लेकिन मुझे पता नहीं था कि विधेयक को लेकर यह फैसला लिया गया है। मैं अखबार नहीं पढ़ता क्योंकि मैं लोगों के साथ रहता हूं वही मेरे लिए खबर है। मैं गरीबों का चेहरा पढ़ता हूं।

देश की आजादी से ज्यादा लंबा रहा है हमारा संघर्ष

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा, जब देश आजादी का सपना नहीं देखता था उससे पहले से हमारे पूर्वज सपना देखते थे। मैं जैसे ही यहां से बाहर निकलूंगा तो पत्रकार साथी माइक मेरे मुंह में ठूस देंगे। यह कोई नयी बात नहीं है। इस राज्य के सोच के विपरीत यहां का राज्यपाल जा रहा है ऐसा नहीं है। कई ऐसे राज्य हैं जहां भाजपा की सरकार जहां नहीं वहां राज्यपाल यह कर रहे हैं। यह दिल्ली नहीं, अंडमान नहीं है यह झारखंड है। यहां वही होगा जो सरकार चाहेगी,गर्वनर चाहेगा वो नहीं होगा।

राज्य को पांच साल एक छ्त्तीसगढ़िया ने चलाया

हेमंत सोरेन ने कहा, इस राज्य को पांच साल राज्य के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी भी नहीं चला सके। फिर आये अर्जुन मुंडा तुर्रम खान वो भी नहीं चला सके। इस राज्य राज्य को पहली बार पांच साल रघुबर दास ने चलाया जो छत्तीसगढ़ के हैं। भाजपा के लोग झारखंड के खून पर भरोसा नहीं करते।

अब बोका लोग ठोकेगा
ये कहते हैं कि जो कानून बनाया है वह नियमसंगत नहीं है। यह कितने दिन होगा हमें कबतक यह लोग बोका सोचेगा। अब यही बोका लोग ठोकेगा। पेट में गमछा बांधकर आंदोलन होता था जब भी इसे असंवैधानिक कहा जायेगा। उस वक्त तो दिशोम गुरू को देखो और गोली मार दो का आदेश दे दिया था।

हेमंत सोरेन ने कहा, आदिवासी जब जब अपनी आवाज उठायेगा इन्हें पेट में दर्द होगा। कहा जा रहा है सरकार ऐसा विधेयक ना लाए जिससे विवाद पैदा हो। यहां के मूल निवासियों को नौकरी देना, अधिकार देना गलत है क्या ? इसे ये लोग असंवैधानिक कहते हैं। अभी यह शुरू हुई है अभी लड़ाई जारी रहेगी। हमने कई जंग जीता है आगे भी जंग जीतेंगे।

हेमंत सोरेन ने मंच से कहा, मैं जब यहां आ रहा था तो आते- आते जानकारी ली कि सोनखंडी, काठीटांड जैसे कई जगह है जरा पता करो यहां पारा शिक्षक कहां से हैं सब बाहरी हैं। हमारे बाल बच्चे यहां नहीं है। कौन सा राज्य में अपने राज्य के लोगों के रोजगार के लिए कानून नहीं बना।

भारत सरकार कानून बनाए

मैं यहां से वापस लौट कर देखूंगा कि राज्यपाल ने क्या लिखा। मैं कहा कह रहा हूं सब राज्य का अधिकार है। सीएनटी- एसपीटी राज्य सरकार ने बनाया। आंदोलन ने केंद्र सरकार को मजबूर किया। हम भी वही करेंगे। हमने कहा, भारत सरकार कानून बनाये। यह राज्य हमें छिन कर मिला है। मांगने से नहीं मिला।

हमारा बकाया है उसे ना देना क्या है संवैधानिक है

हेमंत सोरेन ने मंच से कहा कि मैं पूछना चाहता हूं कि गरीबों को साढे आठ लाख गरीबों को घर देने के लिए पैसे मांगे तो केंद्र सरकार ने घर नहीं दिया क्या ये संवैधानिक है। पूरे देश के मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि जीएसटी के लिए नियम की अवधि नहीं बढ़ाई जा रही है। इससे राज्य को नुकसान हो रहा है क्या यह संवैधानिक है। एक लाख 37 हजार करोड़ कोल और खनन कंपनी से निकलता है। हमें पैसे नहीं मिल रहे क्या यह संवैधानिक है। खनन कंपनियां हमारे कोल से मुनाफा कमा रही है और हम थर्ड और फोर्थ ग्रेड के लिए भीग मांग रहे हैं। यह संवैधानिक है। 40 साल लगे राज्य को अलग करने में। 20 साल लग गये राज्य में मूल वासी को पद पर बने रहेने के लिए। यही लोग थे जिन्होंने राज्य को बनाया।

मंत्रियों ने क्या कहा

इस सभा में स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता, परिवहन मंत्री चंपई सोरेन, सत्यानंद भोक्ता सहित कई विधायक और सरकारी अधिकारी मौजूद रहे। मंत्री और विधायकों ने एक सूर में कहा किसी भी हाल में 1932 आधारित स्थानीय नीति का फैसला टल नहीं सकता। सीएम दोबारा इसे राज्यपाल के पास भेजेंगे।

भाजपा ने गरीबों के विकास के लिए काम नहीं किया

श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने भी इस जनसभा में 1932 के खतियान के विधेयक को वापस करने की चर्चा से अपनी बात शुरू की। सत्यानंद ने कहा, भाजपा के लोग नहीं चाहते कि यह सरकार काम करे। भाजपा के लोग बाधा बन रहे हैं। राज्य में खरीद फरोख्त की कोशिश की गयी। सात साल के शासन में भाजपा ने महंगाई इतनी कर दी जितनी 60 साल में नहीं हुआ। गरीब की चिंता भारत सरकार को नहीं है। झारखंड में बहुमत की सरकार होने के बाद भी काम नहीं हुआ। ना हाथी उड़ा ना डोभा बना। अभी कई और विकास के काम होने बाकि है। चारों उपचुनाव गठबंधन की सरकार ने जीते। रामगढ़ भी जीतेंगे। हमसे कोई गलती होगी तो माफ करना बस भाजपा को साफ करना।

पूर्वज भी लड़े 1932 की लड़ाई

झारखंड के परिवहन मंत्री चंपई सोरेन ने इस सभा को संबोधित करते हुए कहा, यह ऐतिहासिक भूमि है। एक वक्त था जब हम बंगाल राज में थे। जब बंगाल से बिहार अलग हुआ, बिहार से ओड़िशा अलग हुआ तब हमारे पूर्वजों ने नारा दिया हम ना बिहार में रहेंगे ना ओड़िशा में रहेंगे हम झारखंड बनायेंगे। साल 1948 में लाखों की संख्या में लोग एकजुट हुए।

चंपई ने कहा, हमारे बुजुर्गों ने शहीदों ने घोषणा किया था कि हम 1932 आधारित स्थानीय नीति बनायेंगे। हम किसी की गुलामी नहीं करेंगे। खेत खलिहान की आवाज कई बार गूंजी। सिद्धो कान्हू, भगवान बिरसा मुंडा सभी ने यही आवाज उठाई। देश का संविधान भी मूल भावना का सम्मान करता है। यह पांचवी अनुसूची क्षेत्र है। यहां वन अधिकारी नियम है। एसपीटी, सीएनटी एक्ट है। झारखंड का मूल वाली अपने हक के लिए लड़ेगा। 1932 को आधार बनाकर आदिवासी लड़ रहा है। हमारे आदिवासी ने संघर्ष किया है। विरोधियों ने झारखंड आंदोलन को भी गंभीरता से नहीं लिया था।

भाजपा के पास अब कोई मुद्दा नहीं

खतियानी जोहार यात्रा में स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता भी शामिल हुए। उन्होंने इस सभा से संबोधित करते हुए कहा, इस सभा में अभी और भारी भीड़ होगी। इस सभा स्थल में पैर रखने की जगह नहीं होगी। यह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सोच ही है कि अब भाजपा के पास कोई मुद्दा नहीं है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को परेशान करने लिए बहुत हाथ पैर मारा है। राज्य की जनता इनकी चाल को समझ गयी है। यह झारखंड बिरसा मुंडा का है यहां के लोग सीधे और सरल हैं। विरोधी डरे रहते हैं कि मुख्यमंत्री कौन सा नया ऐलान कर देंगे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जिस तरह शासन कर रहे हैं भविष्य में राज्य से भाजपा का नाम मिट जायेगा।

संघर्ष मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उठाया है उसे बल देना है। बाहरी लोग राज्य में प्रवेश कर रहे हैं। बाहरी लोग हमें दीमक की तरह खत्म कर रहे हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राज्य के हित का यहां के आदिवासियों की सोच रहे हैं इसलिए इन्हें परेशान किया जा रहा है। हमें मुख्यमंत्री का सहयोग करना चाहिए। हमारे बीच ऐसे ही लोग हैं जो पीठ पीछे वॉर कर रहे हैं। ऐसे लोगों को पहचानना होगा।

दोबारा राज्यपाल को सौंपा जायेगा विधेयक

सरायकेला के मंच से विधायक और कई नेताओं ने हेमंत सोरेन से अपील की है कि दोबारा विधेयक को राज्यपाल के पास भेजा जाए। झारखंड झारखंडियों के लिए बना है। छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए नहीं। 1985 का नियम लागू होने से बाहरी लोग झारखंड में प्रवेश मिला।

सरायकेला-खरसावां जिला प्रशासन के द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया

कार्यक्रम में सीएम हेमंत सोरेन, आदिवासी कल्याण मंत्री चंपई सोरेन, स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता,सत्यानंद भोक्ता सहित सरकार के कई मंत्री शामिल हैं। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को काशी साहू कॉलेज मैदान स्थित हेलिपैड में सरायकेला-खरसावां जिला प्रशासन के द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

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