ममता बनर्जी के गढ़ में चलेगा ज्योतिरादित्य सिंधिया का जादू? बीजेपी ने दी बड़ी जिम्मेदारी, मंत्री ने संभाला काम
एमपी नगर निकाय चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ में बीजेपी हार गई। ज्योतिरादित्य सिंधिया के गृह नगर ग्वालियर में बीजेपी 58 साल बाद चुनाव हार गई है।
कोलकाता, 24 जुलाई : एमपी नगर निकाय चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ में बीजेपी हार गई। ज्योतिरादित्य सिंधिया के गृह नगर ग्वालियर में बीजेपी 58 साल बाद चुनाव हार गई है। इसके बाद से वह विरोधियों के निशाने पर हैं। विरोधियों के साथ-साथ कुछ अपने लोग भी ज्योतिरादित्य सिंधिया पर सवाल उठा रहे हैं।

नतीजों के बाद पश्चिम बंगाल के प्रभारी और बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने यह कहा था कि ग्वालियर की हार हमारे लिए अलार्मिंग है। पिछले दिनों एक ग्रुप के आने के बाद वहां हम मजबूत हुए थे फिर भी चुनाव हारे हैं। कैलाश के हमले के बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया को पश्चिम बंगाल में बड़ी जिम्मेदारी मिल गई है। पिछले चार सालों के रिकॉर्ड को देखते हुए यह सवाल है कि क्या ममता बनर्जी के गढ़ में ज्योतिरादित्य सिंधिया का जादू चलेगा।
ज्योतिरादित्य सिंधिया को पश्चिम बंगाल में प्रवास मंत्री नियुक्त किया गया है। उन्हें दमदम लोकसभा सीट की जिम्मेदारी दी गई है, जहां बीजेपी पिछले चुनाव में हार गई थी। संगठन की तरफ से जिम्मेदारी मिलने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने काम संभाल लिया है।
उन्होंने कोलकाता पहुंचने के बाद संगठन से जुड़े अलग-अलग लोगों से संवाद किया है। साथ ही दक्षिणेश्वर से बारानगर तक मेट्रो में यात्रा की है। कुछ यूथ लोगों के ग्रुप के साथ भी मंत्री ने बात की है। इसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार पर जमकर हमला किया है।
स्कूल नौकरी घोटाले में पश्चिम बंगाल के उद्योग मंत्री पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी के बाद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आरोप लगाया कि राज्य में तृणमूल कांग्रेस 'भ्रष्टों की सरकार' चला रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार का स्तर 'चौंकाने वाला और अभूतपूर्व है।' सिंधिया ने आरोप लगाया कि टीएमसी सरकार ने कुशासन और भ्रष्टाचार की सभी हदें पार कर दी हैं। अब लोगों के लिए नहीं बल्कि भ्रष्टाचारियों की सरकार है। पूरी सरकार भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी हुई है।
दरअसल, एमपी की राजनीति में ज्योतिरादित्य सिंधिया की हमेशा सुर्खियों में रहते हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया मार्च 2020 में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया के आने के बाद कांग्रेस के 22 से अधिक सदस्यों ने भी प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
अक्टूबर 2020 में 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए थे, इनमें चार सीट विधायकों के निधन से खाली हुए थे। वहीं, 24 सीट ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ आए विधायकों के थे। उपचुनाव में बीजेपी 28 में से 19 सीटों पर जीत हासिल की। इस चुनाव में बीजेपी को 67 फीसदी सफलता मिली।
इस परिणाम को बहुत बेहतर तो नहीं कहा जाता था लेकिन सिंधिया के आने से बीजेपी की ताकत जरूर विधानसभा में बढ़ गई थी। उपचुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया की करीबी इमरती देवी समेत चार लोग हार गए थे।
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