Jharkhand: अब वनांचल आंदोलनकारी भी माने जाएंगे आंदोलनकारी, मिलेगी सम्मान राशि: मंत्री आलमगीर आलम

मंत्री आलमगीर ने कहा कि वनांचल आंदोलनकारियों को प्रोत्साहन राशि, पेंशन और सम्मान मिले, इसके लिए सरकार प्रयास कर रही है।

Hemant Soren

रांची: विधानसभा में सोमवार को प्रश्नकाल के दौरान संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारी चिन्हितिकरण आयोग में वनांचल व जेपी शब्द हटाया गया है।
उन्होंने आगे कहा कि जेपी आंदोलन एक अलग आंदोलन है, जिसका झारखंड आंदोलन से कोई लेना देना नहीं है। लेकिन वनांचल आंदाेलन झारखंड को अलग राज्य बनाने के लिए ही हुआ था, इसलिए वनांचल आंदोलन के आंदोलनकारी भी झारखंड आंदोलनकारी ही माने जाएंगे।

IAS की अध्यक्षता में आंदोलनकारी चिन्हितिकरण आयोग गठित

मंत्री आलमगीर कहा कि वनांचल आंदोलनकारियों को प्रोत्साहन राशि, पेंशन व सम्मान मिले इसके लिए सरकार प्रयासरत है। इसके लिए सेवानिवृत्त अखिल भारतीय सेवा के एक पदाधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय झारखंड आंदोलनकारी चिह्नितिकरण आयोग का गठन किया गया है, जिसका कार्यकाल 13 जुलाई 2024 तक विस्तारित है।

जेपी आंदोलनकारियों के लिए अलग आयोग
मंत्री आलमगीर आलम ने यह जवाब बोकारो से भाजपा के विधायक विरंची नारायण के प्रश्न के जवाब में दिया। विधायक ने सवाल उठाया था कि झारखंड आंदोलनकारी चिह्नितिकरण आयोग से वनांचल व जेपी शब्द हटाया गया है। इसपर सरकार का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि जेपी आंदोलकारी के लिए अलग से आयोग है, उस आंदोलन का झारखंड आंदोलन से कोई लेना देना नहीं है, इसलिए उसके लिए अलग से प्रविधान है।

आंदोलनकारियों की पेंशन बढ़ाने की उठी मांग
इसी प्रश्न के साथ जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय जेपी आंदोलनकारियों के पेंशन को बिहार की तरह बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने जेपी आंदोलनकारियों का पेंशन बढ़ाया है तो यहां के आंदोलनकारियों का भी पेंशन बढ़ना चाहिए।
कांके से भाजपा विधायक समरी लाल ने झारखंड एकेडेमिक काउंसिल के सदस्य रहे झारखंड आंदोलकारियों के पेंशन की मांग की तो टुंडी से झामुमो के विधायक मथुरा प्रसाद महतो ने जेपी आंदोलकारियों की तरह ही झारखंड आंदोलनकारियों के पेंशन की मांग की। मंत्री ने सभी बिंदुओं पर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।

भूमि जल दोहन पर होगी सख्ती
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने कहा कि राज्य में भूमि जल के स्तर को बरकरार रखने के लिए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की सख्ती से पालन कराने की कोशिश जारी है। डीप बोरिंग पर रोक लगाई गई है। नक्शा पास में भी रेन वॉटर हार्वेस्टिंग पर जोर दिया गया है।
सरकार इसके लिए गंभीर है और सेंट्रल वॉटर बोर्ड की तरह अगले साल तक झारखंड का भी अपना ग्राउंड वॉटर बोर्ड बनेगा, जो भूमि जल दोहन पर सख्ती बरतेगा। सरकार नीलांबर-पितांबर जल समृद्धि योजना से जल संरक्षण पर काम कर रही है।

राज्य भूगर्भ जल अधिनियम बनाने की कार्रवाई प्रक्रियाधीन
राज्य भूगर्भ जल अधिनियम बनाने की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। इसके लागू होने के बाद राज्य में भू-जल दोहन को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकेगा। भूमि जल का दोहन कम हो, इसे ध्यान में रखते हुए डीप बोरवेल आधारित सिंचाई योजना का निर्माण नहीं हो रहा है। राज्य में विभिन्न जिलों के सरकारी, अर्द्ध सरकारी, सार्वजनिक भवनों पर 178 रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है।

मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने यह जवाब पोड़ैयाहाट के विधायक प्रदीप यादव के अल्पसूचित प्रश्न के जवाब में दिया। विधायक प्रदीप यादव ने प्रश्न किया था कि सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार रांची, धनबाद, रामगढ़ व अन्य स्थानों के भू-जल की स्थित चिंतनीय है।
तृतीय श्रेणी के समतुल्य वेतन पाने वाले चतुर्थवर्गीय कर्मचारी को मिलेगी प्रोन्नति
झारखंड में दस-बारह सालों से कार्यरत वैसे चतुर्थवर्गीय कर्मचारी जो तृतीय श्रेणी के समतुल्य वेतन पा रहे हैं, उन्हें तृतीय श्रेणी के पद पर प्रोन्नति मिलेगी। मंत्री आलमगीर आलम ने बरकट्ठा के विधायक अमित कुमार यादव के अल्पसूचित प्रश्न के जवाब यह जानकारी सदन को दी। उन्होंने कहा कि प्रोन्नति नहीं मिलना गंभीर बात है। वे नियमावली दिखवाकर इसकी पहल करेंगे।

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