Bajrang Baan: 'सुन लीजै प्रभु अरज हमारी', मंगलवार को क्यों किया जाता है बजरंगबाण? क्या है नियम?
Bajrang Baan: हिंदू धर्म में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक बजरंगबाण का पाठ करने से भक्तों को साहस, आत्मविश्वास और संकटों से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। बजरंगबाण, भगवान हनुमान की स्तुति में रचित एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसका उल्लेख भक्तों के बीच संकट निवारण और मनोकामना पूर्ति के लिए किया जाता है।

बजरंगबाण का पाठ
- निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान
- तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान
- जय हनुमंत संत हितकार, सुन लीजै प्रभु अरज हमारी
- जन के काज बिलंब न कीजै, आतुर दौरि महा सुख दीजै
- जैसे कूदि सिंधु महिपारा, सुरसा बदन पैठि बिस्तारा
- आगे जाय लंकिनी रोका, मारेहु लात गई सुरलोका
- जाय बिभीषन को सुख दीन्हा, सीता निरखि परमपद लीन्हा
- बाग उजारि सिंधु महँ बोरा, अति आतुर जमकातर तोरा
- अक्षय कुमार मारि संहारा, लूम लपेटि लंक को जारा
- लाह समान लंक जरि गई, जय-जय धुनि सुरपुर नभ भई
- अब बिलंब केहि कारन स्वामी, कृपा करहु उर अंतरयामी
- जय-जय लखन प्रान के दाता, आतुर ह्वै दुख करहु निपाता
- जय हनुमान जयति बल-सागर, सुर-समूह-समरथ भट-नागर
- ॐ हनु-हनु-हनु हनुमंत हठीले, बैरिहि मारु बज्र की कीले
- ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा, ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा
- जय अंजनि कुमार बलवंता, शंकरसुवन बीर हनुमंता
- बदन कराल काल-कुल-घालक, राम सहाय सदा प्रतिपालक
- भूत, प्रेत, पिसाच निसाच, र अगिन बेताल काल मारी मर
- इन्हें मारु, तोहि सपथ राम की, राखु नाथ मरजाद नाम की
- सत्य होहु हरि सपथ पाइ कै, राम दूत धरु मारु धाइ कै
- जय-जय-जय हनुमंत अगाधा, दुख पावत जन केहि अपराधा
- पूजा जप तप नेम अचारा, नहिं जानत कछु दास तुम्हारा
- बन उपबन मग गिरि गृह माहीं, तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं
- जनकसुता हरि दास कहावौ, ताकी सपथ बिलंब न लावौ
- जै जै जै धुनि होत अकासा, सुमिरत होय दुसह दुख नासा
- चरन पकरि, कर जोरि मनावौं, यहि औसर अब केहि गोहरावौं
- उठु, उठु, चलु, तोहि राम दुहाई, पायँ परौं, कर जोरि मनाई
- ॐ चं चं चं चं चपल चलंता, ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता
- ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल, ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल
- अपने जन को तुरत उबारौ, सुमिरत होय आनंद हमारौ
- यह बजरंग-बाण जेहि मारै, ताहि कहौ फिरि कवन उबारै
- पाठ करै बजरंग-बाण की, हनुमत रक्षा करै प्रान की
- यह बजरंग बाण जो जापैं, तासों भूत-प्रेत सब कापैं
- धूप देय जो जपै हमेसा, ताके तन नहिं रहै कलेसा
- ताके तन नहिं रहै कलेसा
- उर प्रतीति दृढ़, सरन ह्वै, पाठ करै धरि ध्यान
- बाधा सब हर, करैं सब काम सफल हनुमान।
बजरंगबाण पाठ के फायदे
बजरंगबाण का पाठ मानसिक दृढ़ता बढ़ाता है और व्यक्ति को भय तथा असुरक्षा की भावना से उबरने में मदद करता है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पाठ नकारात्मक प्रभावों और बाधाओं से सुरक्षा प्रदान करता है हनुमान जी को बल, बुद्धि और वीरता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए बजरंगबाण का नियमित पाठ आत्मबल को मजबूत कर सकता है। भक्तों का विश्वास है कि बजरंगबाण के प्रभाव से रुके हुए कार्यों में गति आती है और सफलता के मार्ग खुलते हैं।
बजरंगबाण पाठ के नियम
बजरंगबाण का पाठ श्रद्धा, अनुशासन और पवित्रता के साथ किया जाना चाहिए। बजरंगबाण का पाठ करने से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शारीरिक और मानसिक शुद्धता का विशेष ध्यान रखें।पाठ शुरू करने से पहले भगवान हनुमान के सामने दीपक जलाएं, सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल और गुड़-चना अर्पित करें हालांकि बजरंगबाण का पाठ किसी भी दिन किया जा सकता है, लेकिन मंगलवार और शनिवार को इसका विशेष महत्व माना जाता है।
बजरंगबाण FAQ
- Q1. बजरंगबाण का पाठ कब करना चाहिए?
- उत्तर: मंगलवार और शनिवार को प्रातःकाल या सायंकाल स्नान के बाद श्रद्धापूर्वक बजरंगबाण का पाठ करना शुभ माना जाता है।
- Q2. क्या महिलाएं बजरंगबाण का पाठ कर सकती हैं?
- उत्तर: हां, महिलाएं भी पूरी श्रद्धा और शुद्धता के साथ बजरंगबाण का पाठ कर सकती हैं।
- Q3. बजरंगबाण और हनुमान चालीसा में क्या अंतर है?
- उत्तर: हनुमान चालीसा भगवान हनुमान की महिमा का वर्णन करती है, जबकि बजरंगबाण संकट निवारण और हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने हेतु विशेष स्तुति मानी जाती है।
- Q4. क्या रोज बजरंगबाण पढ़ सकते हैं?
- उत्तर: हां, श्रद्धालु नियमित रूप से इसका पाठ कर सकते हैं। हालांकि इसे पूरी श्रद्धा, एकाग्रता और मर्यादा के साथ पढ़ना चाहिए।
- Q5. बजरंगबाण पढ़ने से कौन-कौन से लाभ मिलते हैं?
- उत्तर: मानसिक शांति, आत्मविश्वास, साहस, संकटों से रक्षा, नकारात्मकता से मुक्ति और आध्यात्मिक उन्नति जैसे लाभ मिलने की मान्यता है।
- Q6. बजरंगबाण पाठ से पहले क्या करना चाहिए?
- उत्तर: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें, भगवान हनुमान के समक्ष दीपक जलाएं और सच्चे मन से पाठ आरंभ करें।














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