Jharkhand: वित्तमंत्री रामेश्वर उरांव ने गिनाईं बजट की खूबियां, सदन में बोले; रोजगार बढ़ेगा
बजट की खूबियां गिनाते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि बजट में अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर चर्चा होनी चाहिए।

झारखंड सरकार के बजट पर सोमवार को सदन में चर्चा के दौरान वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2023-24 का बजट संतुलित, प्रोग्रेसिव, रोजगार बढ़ाने वाला बजट है। वित्त मंत्री ने बजट की खूबियां गिनाते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर बजट में चर्चा होनी चाहिए। रिसोर्स मोबिलाइजेशन पर चर्चा नहीं होती, बजट पर खर्चों का जिक्र बजट में नहीं था। ये सुझाव सरयू राय ने दिया हैं। उनसे सहमति है।
झारखंड-ओडिशा में माइंस रेवेन्यू में अंतर
वित्त मंत्री ने कहा कि झारखंड और ओडिशा में माइंस में रेवेन्यू का अंतर है। वहां 50 हजार करोड़ माइंस से आता है, यहां 10 हजार करोड़ तक का राजस्व आता है। उसे बढ़ाने की कोशिश होगी। वित्त मंत्री ने कहा कि यह बजट कई मामलों में विशिष्ट है। इसके निर्माण में संगोष्ठी की गयी। राज्य व राज्य के बाहर के बुद्धिजीवी, युवाओं की भागीदारी रही। यह हमीन कर बजट है। बजट आकार बड़ा है।
इस बजट में की गई है 15,000 करोड़ की वृद्धि
पिछले बजट की तुलना में इस बार 15 हजार करोड़ रुपये बजट में बढ़ाया गया है। सरकार का यह मानना है कि फंड की कमी के कारण कोई योजना ना रुके। पूंजीगत परिव्यय भी बढ़ाया गया है। पिछले वर्ष पूंजीगत व्यय 18 हजार करोड़ था, जिसे बढ़कर 25 हजार करोड़ किया गया है ताकि स्कूल, नहर, अस्पताल के निर्माण में राशि की कमी नहीं हो।
पूंजीगत व्यय बढ़ने से होगा रोजगार सृजन
वित्त मंत्री ने कहा कि पूंजीगत व्यय के बढ़ने से रोजगार का भी सृजन होगा। अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को सर्वजन पेंशन मिले, इसके लिए प्रावधान किया। विकासात्मक योजनाओं के ऋण के लिए सिंकिंग फंड का प्रबंध किया, विकट परिस्थिति में इस राशि का इस्तेमाल ऋण भुगतान के लिए किया गया। सीकिंग फंड में चालू वित्तीय वर्ष तक 1004 करोड़ का निवेश किया गया है। इस बजट में सीकिंग मद में 567 करोड़ का प्रावधान किया गया है। राज्य कर्मियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम लागू किया। इससे सरकार पर वित्तीय भार बढ़ेगा। इस बात को ध्यान में रखकर पेंशन कोष का गठन किया ताकि इसका बोझ कम पड़े। 700 करोड़ इस कोष में डाला। ये बजट की विशेषता है।
पुरानी घोषणाओं को पूरा नहीं कर सकी सरकार
विधायक अमित मंडल ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि बजट में नया कुछ नहीं है। सरकार पुरानी घोषणाओं को भी पूरा नहीं कर सकी है। पिछले बजट सत्र में जितनी भी घोषणाएं हुई थीं, उसपर अमल नहीं हुआ है। कहा कि सरकार के खजाने में ही छेद है। धरातल पर कुछ दिखता नहीं लेकिन पैसे छेद से बाहर निकल जाता है। अमित मंडल ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था के घड़े में लीकेज है, इसे इकॉनोमिकल लीकेज कहते हैं। राज्य सरकार ने अपना कोई वादा भी पूरा नहीं किया, नियोजन व स्थानीयता नीति पर सरकार फेल रही। वहीं राज्य में मनरेगा की स्थिति भी खराब है।
सत्तापक्ष के विधायक को समय देने पर विपक्ष का हंगामा
विधायक प्रदीप यादव को सदन में अधिक वक्त वक्त देने के विरोध में बीजेपी के मुख्य सचेतक बिरंची नारायण और विधायक रणधीर सिंह बेल में आ गए। बीजेपी विधायक स्पीकर से जानना चाह रहे थे कि प्रदीप यादव को निर्धारित से ज्यादा समय क्यों दिया गया। विधायकों ने इसे लेकर हंगामा किया कि स्पीकर ने उन्हें तय वक्त से अधिक बोलने दिया। अडानी अंबानी और केंद्र सरकार पर प्रदीप यादव ने बोलना शुरू किया तब सीपी सिंह ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए पूछा कि प्रदीप यादव किस हैसियत से बोल रहे हैं। वह जेवीएम के विधायक हैं, कांग्रेस के विधायक हैं या निर्दलीय हैं। भाजपा विधायकों ने स्पीकर पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए सदन से वॉक आउट कर निकल गए।
बजट में होना चाहिए था 3 वर्ष के खर्चों का आंकड़ा
निर्दलीय विधायक सरयू राय ने कहा कि बजट को बढ़िया से बनाया गया है, लेकिन बजट में 3 वर्षों के खर्च का भी आंकड़ा रहना चाहिए था। पिछले 3 वर्षों के बजट का खर्च 78 फीसदी से ज्यादा नहीं हुआ। चालू वित्तीय वर्ष में भी 65 प्रतिशत राशि ही खर्च हुई है। इसमें भी 15 हजार करोड़ से ज्यादा राशि पीएल एकाउंट में है। इस हिसाब से खर्च 50 फीसदी के करीब हुआ। उन्होनें कहा कि कृषि विभाग में 18 प्रतिशत, शहरी विकास में 39 प्रतिशत, ग्रामीण विकास में 50 प्रतिशत राशि ही खर्च हुआ है, जबकि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में 111 प्रतिशत, नागर विमानन में आवंटित राशि से 112 प्रतिशत ज्यादा खर्च किया गया है। उन्होंने साफ कहा कि कुछ मामले में सरकार खासकर नियोजन और स्थानीय नीति पर शेर की सवारी कर रही थी। शेर की सवारी ज्यादा दिनों तक नहीं चलती। स्थानीय और नियोजन नीति में सरकार को संविधान के अनुसार काम करना चाहिए।












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