Jharkhand: बिरसा हरित ग्राम योजना से बढ़ेगी किसानों की आय, पढ़ें क्या है ये योजना
झारखंड: राज्य और केंद्र सरकार का लक्ष्य देश और राज्यों के किसानों की आय दोगुनी करना है।

Jharkhand: देश और राज्यों के किसानों कि आय दोगुनी करना राज्य और केंद्र सरकार का लक्ष्य है। इसी लक्ष्य के साथ केंद्र की सरकार कार्य कर रही है। साथ ही राज्य सरकार भई इसी चीज को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बना रही है। किसानों की आय को दोगुनी करने के लिए उनकी कमाई को दोगुना करना होगा या फिर कृषि में उनकी लागत को कम करनी होगी। इसके अलावा किसान के लिए आय के स्त्रोत के ऐसे इंतजाम करने होंगे जहां पर किसान एक बार पूंजी लगाकर हर साल उससे आमदनी कर सकते हैं। बिरसा हरित ग्राम योजना भी एक ऐसी ही योजना है, जो किसानों की आय में बढ़ोतरी करने में मददगार हो सकती है।
गौरतलब है कि झारखंड एक ऐसा राज्य है, जहां पर बागवानी की आपार संभावनाएं हैं। लेकिन, यहां पर उसके अनुरुप कार्य नहीं हुआ है। इसे देखते हुए राज्य सरकार द्वरा बिरसा हरित ग्राम योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत राज्य की दो लाख एकड़ खाली पड़ी जमीन पर आम, अमरुद के अलावा मिश्रित फलों की खेती करने का लक्ष्य रखा गया है। इस लिहाज से राज्य के हर जिले में लगभग 1400 एकड़ जमीन में फलों की खेती की जाएगी। इसमें नींब का पेड़ भी शामिल है।
किसानों की बढ़ेगी आय
बिरसा हरित ग्राम योजना का मूल उद्देश्य किसानों की आय को बढ़ाना है और राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस योजना का लाभ लेकर ग्रामीण तीन साल बाद 50, 000 रुपए तक की कमाई कर सकते हैं। योजना के तहत पेड़ लगाने के लिए सभी को प्रोत्साहित किया जाएगा और राज्य के पांच लाख परिवारों को प्रति परिवार 100-100 पौधे दिए जाएंगे। इस तरह से राज्य। भर में लगभग पांच करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। बताते चलें कि योजना के तहत प्रत्येक जिले में 1400 एकड़ खाली जमींन चिन्हित की गई है और आम की बागवानी उसमे की जा रही है।
फल उत्पादन का हब बनेगा झारखंड
फलदार वृक्ष लगने के बाद किसान उसे तोड़कर बेचने के अधिकारी होंगे, इससे किसानों के लिए आय का एक स्त्रोत बनेगा। साथ ही झारखंड फलों के निर्यातक के तौर पर अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो सकेगा। योजना के तहत आम के बेहतर प्रभेद मल्लिका, और आम्रपाली के अलावा के साथ साथ इलाहाबाद सफेदी प्रजाति के अमरूद के पौधे लगाए जा रहे हैं। जब सभी पेड़ बड़े हो जाएंगे और फल देने लगेंगे तब झारखंड इन फलों का निर्यातक बन जाएगा। इसलिए इसे एक क्रांतिकरी योजना मानी जा रही है। साथ ही यह किसानों के लिए भी काफी फायेदमंद होगा।












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