Jharkhand: मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर हो रहा झारखंड, छह साल में रिकॉर्ड 295 मीट्रिक टन उत्पादन
झारखंड जल्द ही मछली का निर्यातक राज्य बनने जा रहा है। ऐसा संभव हो पाया है प्रोडक्शन में हो रही लगातार वृद्धि की बदौलत। राज्य में बीते छह साल के मुकाबले इस साल सबसे ज्यादा प्रोडक्शन हुआ है।

झारखंड जल्द ही मछली का निर्यातक राज्य बनने जा रहा है। ऐसा संभव हो पाया है प्रोडक्शन में हो रही लगातार वृद्धि की बदौलत। राज्य में बीते छह साल के मुकाबले इस साल सबसे ज्यादा प्रोडक्शन हुआ है। इस साल राज्य में 295 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ है। यह आंकड़ा बीते छह साल के आंकड़ से 180 मीट्रिक टन ज्यादा है। मत्स्य निदेशालय ने साल 2021 में मछली उत्पादन का लक्ष्य 265 मैट्रिक टन रखा था. वहीं उत्पादन लक्ष्य से 30 मीट्रिक टन ज्यादा है।
राज्य में 1056 जगहों पर तैयार होता है बीज
मछली के उत्पादन में बढ़ोत्तरी को देखते हुए राज्य सरकार इससे लोगों को जोड़ने का काम कर रही है। वहीं इसे रोजगार का बेहतर विकल्प भी मान रही है। मत्स्य निदेशालय की माने तो साल 2024-25 तक झारखंड मछली का निर्यात भी करने लगेगा। राज्य के लगभग सभी हिस्से में मछली उत्पादन किया जा रहा है। इसके लिए 1056 स्थानों पर मछली का बीज तैयार किया जा रहा है। बताते चलें कि झारखंड में करीब 1.77 लाख हेक्टेयर का जल क्षेत्र उपलब्ध है। जबकि इसमें राज्य की कुल 16 बड़ी नदियों का जल क्षेत्र शामिल नहीं है. 15496 सरकारी व 85849 निजी तालाब में हो रहा उत्पादन
बताते चलें कि राज्य में या तो डैम में या फिर तालाब में मछली का उत्पादन हो रहा है। इनकी संख्या की बात करें तो राज्य भर में 15496 सरकारी व 85849 निजी तालाब हैं, जहां उत्पादन हो रहा है। इनमें रेहू, कतला व अन्य मछलियां शामिल हैं।
मछलियों के नस्ल पर भी हो रहा काम
मत्स्य निदेशालय न केवल मछली उत्पादन और इससे स्वराज को जोड़ रहा है, बल्कि अब मछलियों के बेहतर नस्ल बनाने की दिशा में काम भी कर रहा है। निदेशालय के मुताबिक उन्नत किस्म की मछली ज्यादा स्वादिष्ट होगी. बीमारी से मुक्त होगी. साथ ही इसका आकार भी बड़ा होगा और ग्रोथ भी बेहतर करेगा।
जानें कैसा रहा उत्पादन
वर्ष- उत्पादन (मैट्रिक टन में)
2015-16-115
2016-17-145
2017-18-190
2019-20-208
2020-21-223
2021-22-295












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