सोनीपत में मारुति सुजुकी का प्लांट लगने से 15 हजार युवाओं को मिलेगा रोजगार- दुष्यंत चौटाला
हरियाणा, मई 15। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने हरियाणा के सोनिपत जिले में अपना प्रोडक्शन प्लांट लगाने के लिए करीब 900 एकड़ की जमीन फाइनल कर ली है। हरियाणा सरकार के साथ लंबे समय से चल रही बातचीत के सफलतापूर्वक परिणाम देखने को मिले हैं। इन्हीं बातचीतों का असर है कि मारुति सुजुकी सोनीपत में नया प्लांट लगाने का फैसला कर चुकी है। हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने शनिवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि अगर सोच और नीयत सही हो तो प्रगति नहीं रुक सकती और प्रदेश सरकार ने कोरोना काल सरीखी विपरीत परिस्थितियों में भी हरियाणा में ऐसा करके दिखाया है।

दुष्यंत चौटाला ने कहा कि बीते एक वर्ष के भीतर प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर करीब 28 हजार करोड़ रुपये का निवेश हुआ है, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नये अवसर सृजित हुए हैं। डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने कहा कि खरखौदा में भी मारुति-सुजुकी ने 900 एकड़ में अपना प्लांट स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, जिसका विशेष लाभ क्षेत्र व क्षेत्र के युवाओं को मिलेगा। उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला रविवार को खरखौदा की नई अनाज मंडी में जेजेपी द्वारा आयोजित जनसभा को संबोधित कर रहे थे।
डिप्टी सीएम चौटाला ने कहा कि मारुति-सुजुकी खरखौदा में वर्ष 2025 में पहली गाड़ी का निर्माण करेगी और यहां 100 एकड़ में सुजुकी मोटरसाइकिल बनाएगी और 800 एकड़ में मारुति इलेक्ट्रिक गाड़िया बनाएगी। डिप्टी सीएम चौटाला ने कहा कि मारुति उद्योग में 11 हजार से ज्यादा तथा सुजुकी के मोटरसाईकिल उद्योग में लगभग 3000 युवाओं को रोजगार मिलेगा यानी कि करीब 15 हजार युवाओं को रोजगार प्राप्त होगा, जिनमें निजी क्षेत्र में हरियाणा के युवाओं को आरक्षण देने के लिए बनाए गए कानून के चलते 75 प्रतिशत रोजगार प्रदेश के युवाओं को मिलेगा।
डिप्टी सीएम चौटाला ने कहा कि मारुति-सुजुकी का मदर प्लांट स्थापित होगा, जिसके सहारे अनेकों छोटी औद्योगिक इकाइयां भी स्थापित होंगी। उन्होंने कहा कि आने वाले पांच वर्षों में खरखौदा को अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर अलग पहचान मिलेगी। डिप्टी सीएम ने कहा कि गुरुग्राम की तर्ज पर खरखौदा के विकास को गति दी गई है।
डिप्टी सीएम चौटाला ने किसानों के विषय पर बोलते हुए कहा कि पहले किसानों को उनकी फसलों का भुगतान देरी से मिलता था लेकिन अब तुरंत प्रभाव से सीधा किसानों के खातों में भुगतान किया जाता है। उन्होंने कहा कि फसल खराबे के पैसे के लिए भी पहले किसानों को दिक्कतें आती थी क्योंकि पटवारी की गिरदावरी पर ही मुआवजा निर्भर करता था और जिसमें 25 प्रतिशत खराबा होने पर ही मुआवजा मिलता था।
उन्होंने कहा कि अगली फसल से किसानों के हित में प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि पोर्टल बनाकर किसानों को उनकी खराब फसल का ब्यौरा अपलोड करने का अधिकार दिया जाए।












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