हरियाणा सरकार का बड़ा ऐलान, युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के परिजनों को मिलेगी नौकरी
हरियाणा सरकार ने देश की सेवा में प्राण न्यौछावर करने वाले शहीद जवानों और सशस्त्र पुलिस बलों के परिवारों के सदस्यों को अनुकम्पा आधार पर सरकारी नौकरी देने को लेकर एक नीति की अधिसूचना जारी की है।
मुख्य सचिव संजीव कौशल के अनुसार नीति के तहत रक्षा अधिकारियों, गृह मंत्रालय द्वारा सशस्त्र बल या केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल को किसी भी ऑपरेशन या किसी निर्दिष्ट क्षेत्र में ऑपरेशन के दौरान संघर्ष, आईईडी विस्फोट, आतंकवादी या उग्रवादी हमलों, सीमा पर झड़पों और एम.टी. काडिर्यक अरेस्ट, हवाई दुर्घटना और प्राकृतिक आपदाओं में असाधारण साहस और कर्तव्य पालन करने और संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में कर्तव्यों के निर्वाह के दौरान आदि घटनाओं में शहीद होने वाले जवानों आश्रितों को संशोधित अनुकम्पा नीति के अनुसार सरकारी नौकरी प्रदान की जाएगी।

उन्होंने बताया कि इससे पहले 30 मई 2014 और 28 सितम्बर 2018 की पिछली नीतियों के अनुसार सरकारी नौकरियां केवल उन शहीदों के आश्रितों को दी जाती थीं जो सीमा पर झड़पों, आतंकवादी हमलों या दंगों में मारे जाते थे और जिन्हें रक्षा मंत्रालय या गृह मंत्रालय द्वारा शहीद घोषित किया जाता था। श्री कौशल के अनुसार अनुकम्पा नीति में पात्र परिवार के सदस्यों की परिभाषा को भी बढ़ाया गया है। नई नीति का उद्देश्य सशस्त्र बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के युद्ध में शहीद जवानों के हरियाणावासी परिवार के पात्र सदस्यों में से एक को अनुकम्पा नियुक्ति के माध्यम से नौकरी प्रदान कर परिवार की मदद करना है।
अनुकम्पा नियुक्ति हेतु हताहत के परिवार में पति या पत्नी हैं और वे नियुक्ति नहीं चाहते हैं, तो विवाहित या अविवाहित बच्चों में से किसी एक को लाभ दिया जाएगा। इसमें कानूनी रूप से गोद लिए गए बच्चे भी शामिल किए गए हैं, बशर्ते कि शहीद सैनिक ने जीवित रहते वह बच्चा गोद लिया हो। यदि शहीद सैनिक अविवाहित था तो उसके माता-पिता की सहमति से ही अविवाहित या विवाहित भाई या अविवाहित बहन या जिसके लिए माता-पिता, भाईयों और अविवाहित बहनों द्वारा सहमति दी जाती है उसे नीति का लाभ दिया जाएगा।












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