6 परियोजनाओं को सीएम मनोहर लाल खट्टर ने दी मंजूरी, 96 करोड़ आएगी लागत
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में यहां हुई हाई पावर लैंड परचेज कमेटी (एचपीएलपीसी) की बैठक में 5 जिलों चरखी दादरी, फरीदाबाद, हिसार, जींद और सिरसा में 6 परियोजनाओं के लिए भू-मालिकों की सहमति से ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से 148 एकड़ भूमि की खरीद को मंजूरी दी गई है। इस पर लगभग 96 करोड़ की लागत आएगी।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संबंधित जिला उपायुक्तों के साथ एचपीएलपीसी की बैठक की अध्यक्षता करते हुए निर्देश दिए कि एक माह में इन जमीनों की रिजस्ट्री करवाना सुनिश्चित की जाए और भूमि खरीदने के बाद प्रस्तावित परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई जाए। बैठक में उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला और ऊर्जा मंत्री रणजीत सिंह भी उपस्थित रहे।

इसके अलावा, संबंधित जिलों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तावित सरकारी परियोजनाओं के लिए अपनी जमीन देने पर सहमति जताने वाले भू-मालिकों ने भी बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में जींद में बरोदी, झांजकलां में नहर आधारित जलापूर्ति योजना के निर्माण हेतु 5.39 एकड़ भूमि की खरीद को मंजूरी दी गई। इस वॉटर वर्क्स की क्षमता 6 एलएलडी होगी।
इसके अलावा, सिरसा जिले के रानियां गांव में भी वॉटर वर्क्स हेतु लगभग 35 एकड़ भूमि की खरीद को स्वीकृति दी गई। हिसार में ओपी जिंदल नलवा डिस्ट्रीब्यूटरी के विस्तार हेतु 4 एकड़ भूमि की खरीद को भी मंजूरी दी गई। बैठक में चरखी दादरी में जेल के निर्माण हेतु गांव भैरवी में 98 एकड़ जमीन की खरीद को मंजूरी दी गई।
तो वहीं, फरीदाबाद में दिल्ली-मथुरा रोड से मुजेसर तक रेलवे लाइन क्रॉसिंग पर आरयूबी के निर्माण हेतु लगभग 1 एकड़ भूमि, हिसार जिला में बास टाउन में बने वॉटर वर्क्स को अपग्रेड करने हेतु एसटीपी बनाने के लिए 5.12 एकड़ भूमि की खरीद को मंजूरी प्रदान की गई। बैठक में जुड़े भू-मालिकों ने पारदर्शी तरीके से सरकारी परियोजनाओं के लिए ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से भूमि की खरीद हेतु शुरू की गई।
इस पहल के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार किसानों व गरीब का भला सोचती है। मनोहर लाल ने कहा कि भूमि अधिग्रहण एक लंबी प्रक्रिया थी, जिसके कारण विभिन्न विकास परियोजनाओं में अनावश्यक देरी होती थी, इसलिए हमारी सरकार ने एक प्रणाली विकसित की, जिसके तहत ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से किसानों और भू-मालिकों से बातचीत कर उनकी सहमति से भूमि खरीदी जा रही है।












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