आंध्र प्रदेश की ऊर्जा क्षमता का अध्ययन करेगी जर्मन एजेंसी
'राज्यों में ऊर्जा दक्षता-मानचित्रण और आगे की राह' नाम से जीआईजेड द्वारा शुरू की गई ये पहल, विशेष रूप से औद्योगिक क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता से संबंधित आंध्र प्रदेश की नीतियों को समझने और उनकी तुलना करने में मदद करेगी।

आंध्र प्रदेश राज्य ऊर्जा संरक्षण मिशन (एपीएसईसीएम) द्वारा किए जा रहे प्रयासों के लिए जर्मन कॉर्पोरेशन फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (जीआईजेड), राज्य की ऊर्जा दक्षता और संरक्षण उपायों को मैप करने के लिए आगे आया है।
'राज्यों में ऊर्जा दक्षता-मानचित्रण और आगे की राह' नाम से जीआईजेड द्वारा शुरू की गई ये पहल, विशेष रूप से औद्योगिक क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता से संबंधित आंध्र प्रदेश की नीतियों को समझने और उनकी तुलना करने में मदद करेगी। जीआईजेड ने इस परियोजना को प्राइसवाटरहाउसकूपर्स (PwC) को सौंपा है।
राज्य के अधिकारियों के मुताबिक इस मानचित्रण अध्ययन के परिणाम से ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने और अन्य राज्यों में उपयुक्त नीतिगत हस्तक्षेपों के विकास का समर्थन करने की आवश्यकता को समझने में मदद मिलेगी। यह अध्ययन ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (बीईई) और जीआईजेड द्वारा हाल ही में शुरू किए गए कार्यक्रम 'उद्योग और डेटा में ऊर्जा दक्षता' का हिस्सा है। अध्ययन का उद्देश्य एमएसएमई उद्योगों में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देना और प्रासंगिक हितधारकों के लिए जानकारी साझा करने की गतिविधियों का संचालन करना है।
आंध्र प्रदेश में जीआईजेड की गतिविधि ऐसे समय में आई है, जब APSECM राज्य सरकार को 'आंध्र प्रदेश ऊर्जा संरक्षण और ऊर्जा दक्षता नीति' का प्रस्ताव देने जा रहा है, जिससे लगभग 65,830 मिलियन यूनिट की कुल वार्षिक ऊर्जा मांग में से ₹11,779 करोड़ मूल्य की लगभग 16,875 मिलियन यूनिट बिजली की बचत होने की उम्मीद है। इससे लगभग 14.34 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन कम होने की उम्मीद है।












Click it and Unblock the Notifications