डिप्टी CM रह चुके सुखबीर बादल बोले- वोट देकर शिअद-बसपा की सरकार बनाएं, जिसे चाहें उस कॉमेडियन को रख लेंगे
अमृतसर। पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल अपनी पार्टी शिअद (शिरोमणि अकाली दल) की बैठकों व जनसभाओं में विरोधियों पर तंज कसने से नहीं चूकते। उन्होंने सियासत में कलाकारों विशेषकर कॉमेडियन की सक्रियता पर ऐसी बात कही कि उनके सभा-स्थल में मौजूद लोग लोट-पोट हो गए। सियासी पार्टियों में कॉमेडियन को मिले हुए अहम पद और भविष्य में उनकी सियासी पदों को लेकर दावेदारी पर कटाक्ष करते हुए सुखबीर बादल बोले कि, राजनीति इनके बस की बात नहीं है। इन लोगों ने सियासत को कॉमेडी शो बनाकर रख दिया है। आप इसकी चिंता न करें, आप हमें वोट डालें और शिअद-बसपा की सरकार बनाएं। फिर.. आप अपने मनोरंजन के लिए जिस कॉमेडियन की मांग करेंगे, अकाली दल उसे हायर कर लेगा और आपको मनोरंजन भी कराया जाएगा। फिर चाहे वह किसी भी पार्टी का नेता कॉमेडियन ही क्यों न हो।

पक्का मौन धर लें गुरु
पिछले लंबे समय से पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू के ग्रह सीधे होते दिखाई नहीं दे रहे हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह के बाद मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ शुरू हुए सियासी विवाद के बीच जब लखीमपुर खीरी में घटना हुई तो इसमें सिद्धू कहां पीछे रहने वाले थे। लावलश्कर के साथ लखीमपुर जाने की घोषणा कर दी गई। लावलश्कर इकट्ठा हुआ और कूच से पहले उनके बोल फिर पकड़े गए और उनकी सीएम पद की मंशा एक बार फिर से उजागर हो गई। विकट हालात से बचने के लिए गुरु ने मौन धारण कर लिया। अमृतसर आए तो भी मौन व्रत की घोषणा कर दी। इसे लेकर कांग्रेसी गलियारों में चर्चा बनी रही कि गुरु पक्का ही मौन धारण कर लें। जब वह बोलते हैं तो कोई न कोई बखेड़ा शुरू हो जाता है। फिर उससे बचने के लिए नई रणनीति शुरू हो जाती है।
आपने तो वोट भी नहीं डाले
पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल हाल ही में गुरुनगरी आए। वोटबैंक साधने के लिए कई कार्यक्रम हुए। कहीं पैदल मार्च तो कहीं नुक्कड़ बैठकें हुईं। जीटी रोड के एक होटल में कार्यक्रम में जब सुखबीर उद्योगपतियों की समस्याएं सुन रहे थे तो बरबस ही उनके मुंह से निकल गया कि काम तो हमारी सरकार ने बहुत किए थे। करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट गुरुनगरी में लगवाए, जो दिख भी रहे हैं। इतने प्रोजेक्ट लगाए कि आज तक उनका प्रबंधन वर्तमान सरकार से नहीं हो पा रहा है। उन्होंने सवाल करने के अंदाज में पूछा कि हमने तो गुरुनगरी में इतना काम करवाया, पर क्या आपने हमें वोट दिए। हमें वोट दिए होते तो आज जो समस्याएं लेकर आप आ रहे हैं, शायद ये खड़ी ही ना होतीं। व्यापारियों ने भी उनकी हां में हां मिलाते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने तो व्यापार-इंडस्ट्री के लिए हालात ही विकट बना दिए हैं।

मुहिम चलाने में क्या हर्ज
कृषि कानूनों को लेकर भाजपा की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। खुद वर्कर व नेता इसको लेकर परेशान हैं कि किसानों की ओर से हर जगह भाजपा नेताओं का विरोध किया जा रहा है। ऐसे में 2022 के चुनाव को लेकर हाईकमान द्वारा भी स्थिति स्पष्ट न होने से वर्करों में हताशा तो जरूर है, पर इस बीच नेताओं ने चुनाव अभियान शुरू कर दिया है। 'अपना पंजाब भाजपा सरकार, भारतीय जनता पार्टी को वोट देओ' के पोस्टर इंटरनेट मीडिया पर डालते हुए नेताओं ने इस उम्मीद से चुनावी माहौल बनाना शुरू कर दिया है कि शायद तब तक कृषि कानूनों का मामला हल हो जाए। जैसे ही यह मामला निपटेगा, उसके बाद वे पूरी ताकत से मैदान में डटेंगे। इंटरनेट मीडिया के जरिए शिद्दत से इस अभियान को हवा दी जा रही है ताकि अंतिम समय में ऐसा न कहा जाए कि भाजपा ने किया ही कुछ नहीं।












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