छत्तीसगढ़ः मनरेगा के कामों में हुई अनियमितता! मंत्री टी एस सिंह देव ने विधानसभा में दी जानकारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में गरीबों की लाइफलाइन कही जाने वाली मनरेगा योजना में अनियमितता मिली है। इसके चलते प्रदेश सरकार ने कुछ कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई भी की गई है। वहीं, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी एस सिंह देव ने सोमवार को राज्य में मरवाही वन संभाग में मनरेगा के तहत चलने वाले कामों में वित्तीय अनियमितता के आरोप में 15 कर्मचारियों को निलंबित करने की घोषणा की है।

दरअसल, छत्तीसगढ़ विधानसभा में सिंहदेव ने कांग्रेस विधायक गुलाब कमरो के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब में जिला पंचायत के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) समेत 15 अधिकारियों-कर्मचारियों को निलंबित करने की घोषणा की. इस दौरान कमरो ने अपने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के अंतर्गत मरवाही वन मंडल में मनरेगा योजना के तहत पुलिया और स्टॉपडेम के निर्माण में अनियमितता का आरोप लगाया था।
रकम हजम कर वित्तीय अनियमितता किए जाने की मिली थी शिकायत
वहीं, कमरो ने कहा कि बिना काम किए ही सामाग्री की राशि हजम कर वित्तीय अनियमितता किए जाने की शिकायत मिली थी. जिसपर कलेक्टर ने जांच की थी और यह सही पाई गई थी. उन्होंने कहा कि इसके बावजूद छत्तीसगढ़ शासन (Chhattisgarh Government) ने अब तक जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं की है. इस पर कमरो ने सवाल किया कि इस अनियमितता में कितने अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे. इसके अलावा उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है?
मनरेगा के कार्य में अनियमितता मामले में 15 अधिकारी शामिल
बता दें कि विधानसभा में जवाब के दौरान मंत्री सिंहदेव ने कहा कि यह सच है कि इस मामले की शिकायत प्राप्त हुई है। हालांकि, मामले की जांच-पड़ताल के के दौरान जानकारी मिली कि मरवाही वन मंडल के वन मंडल अधिकारी समेत वन विभाग के 15 अधिकारी व कर्मचारियों ने नियमों का उल्लंघन किया है। फिलहाल वन मंडल अधिकारी सेवा से रिटायर हो चुके हैं। मंत्री ने कहा कि वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के अलावा तत्कालीन जिला पंचायत के सीईओ की भी इस मामले में प्रथम दृष्टया गलती पाई गई है।
अनियमितता में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज की जाएगी FIR
गौरतलब है कि मंत्री सिंहदेव ने कहा कि वह सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) को तत्कालीन सीईओ को निलंबित करने के लिए पत्र लिखेंगे। उन्होंने सेवानिवृत्त वन मंडल अधिकारी के खिलाफ भी उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। जहां पर मुख्य विपक्षी दल बीजेपी और सत्ता पक्ष के सदस्यों ने मंत्री से मांग है कि वह अनियमितताओं के लिए दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को सस्पेंड़ करने की घोषणा करें, जिसके बाद सिंहदेव ने वन विभाग के 14 अधिकारियों-कर्मचारियों और तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ को निलंबित करने की घोषणा की। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरी होने पर अनियमितता में शामिल लोगों के खिलाफ FIR भी दर्ज कराई जाएगी।












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