'नीयति पर होता है शक', वन नेशन- वन इलेक्शन पर बोले- सीएम अशोक गहलोत
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा- NDA सरकार जल्दीबाजी में विपक्षी पार्टियों को विश्वास में लिए बिना ही कमिटी बना दी जिससे इनकी नीयत पर शक होता है। पहले भी एक साथ चुनाव होते थे।
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि "वन नेशन, वन इलेक्शन" कोई नया मुद्दा नहीं है। 1967 तक देश में एक साथ ही लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ ही होते थे। पूर्व में लॉ कमीशन, चुनाव आयोग और कई संसदीय समितियों ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट दी हैं परन्तु NDA सरकार जल्दीबाजी में विपक्षी पार्टियों को विश्वास में लिए बिना ही कमिटी बना दी जिससे इनकी नीयत पर शक होता है।
आजादी के बाद लागू था वन नेशन, वन इलेक्शन
वन नेशन, वन इलेक्शन या एक देश-एक चुनाव का मतलब हुआ कि पूरे देश में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ ही हों। आजादी के बाद 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ ही हुए थे, लेकिन 1968 और 1969 में कई विधानसभाएं समय से पहले भंग कर दी गईं। उसके बाद 1970 में लोकसभा भी भंग कर दी गई। इस वजह से एक देश-एक चुनाव की परंपरा टूट गई।

अधीर रंजन का शामिल होने से इंकार
केंद्र सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक देश, एक चुनाव पर 2 सितंबर को एक कमेटी बनाई है। इसमें गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी और पूर्व सांसद गुलाम नबी आजाद समेत 8 मेंबर होंगे। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल कमेटी की बैठकों में स्पेशल मेंबर के तौर पर शामिल होंगे। हालांकि, इस कमेटी में नाम आने के बाद अधीर रंजन ने गृहमंत्री अमित शाह को लेटर लिखा। उन्होंने कहा कि मैं इस समिति में काम नहीं करूंगा, क्योंकि ये धोखा देने के लिए बनाई गई है।
एक देश-एक चुनाव पर बिल ला सकती है सरकार
बता दें सरकार ने 18 सितंबर से 22 सितंबर तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार एक देश, एक चुनाव पर बिल ला सकती है। इससे पहले कानून मंत्रालय ने कमेटी बनाई है। इसका मकसद कानून के मौजूदा ढांचे को ध्यान में रखते हुए देश में एकसाथ चुनाव कराने को लेकर जांच करना है। इसमें जांच की जाएगी कि लोकसभा, विधानसभा, नगर पालिका और पंचायतों के चुनाव एक साथ हो सकते हैं या नहीं।












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