हरियाणावासियों का ऐसे दिल जीत रहे हैं उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, कुलदीप बिश्‍नोई भी स​क्रिय

पानीपत। हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला महज 34 वर्ष के हैं। जननायक जनता पार्टी को दस सीटें जीताकर भाजपा के साथ गठबंधन सरकार बना चुके हैं। परिपक्व इतने हैं कि विधानसभा सत्र में विपक्ष के बड़े नेताओं को विनम्रता से जवाब देते हुए उनका भी दिल जीत लेते हैं। चर्चा इन दिनों उनकी फिटनेस की हो रही है। फेसबुक-इंस्टाग्राम पर छाए हुए हैं। भारी डंबल उठाकर शारीरिक अभ्यास करते हुए उनके वीडियो खूब वायरल हो रहे हैं। छोरा मैं हरियाणा का..गीत बज रहा होता है। हरियाणा के इस छोरे ने राजनीति में तो कमाल कर ही दिया है। अच्छे से जानते हैं कि हरियाणवियों में जिम और अखाड़ों का क्रेज है ही। सत्ता की चाबी व मजबूत करनी है तो युवाओं का बड़ा वर्ग साथ लेकर चलना ही होगा। पहले सभा में युवा नारे लगाते थे , जहां दुष्यंत वहां हम। अब नारे लगते हैं, डिप्टी शब्द हटाओ, पूरा सीएम लाओ।

Deputy Chief Minister Dushyant Chautala winning the hearts of the people of Haryana.

इसलिए कुलदीप बिश्‍नोई जीटी बेल्‍ट पर सक्रिय
हरियाणा की सियासत के पीएचडी कहे जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री स्व. भजनलाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई ने जीटी रोड बेल्ट पर सक्रियता बढ़ा दी है। करनाल में बैठक कर चुके हैं। अब पानीपत के कार्यकर्ताओं के साथ रूबरू होना है। दरअसल, हाईकमान तक उनकी पूछ बढ़ गई है। बिश्नोई जानते हैं कि जीटी बेल्ट की 36 सीटों से ही सत्ता का रास्ता खुलता है। पिछली बार भाजपा ने 16, जजपा ने पांच सीटें जीतकर गठबंधन सरकार बना ली। सोनीपत, पानीपत , जींद, कैथल, कुरुक्षेत्र, करनाल, यमुनानगर व अंबाला में जिसका सियासी बल्ला चला , सत्ता की बाउंड्री वही लपकेगा। करनाल लोस सीट से 1998 में भजनलाल ने जीत दर्ज की थी। यहां उनकी पकड़ रही। बिश्नोई ने जब हरियाणा जनहित कांग्रेस बनाई तो धर्म सिंह छौक्कर , जिले राम इसी बेल्ट से जीतकर आए। कुलदीप की सक्रियता की वजह से ही हुड्डा ग्रुप के पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा नाराज हैं।

अन्‍नदाता, आपसे ये उम्‍मीद नहीं थी
किसान अन्नदाता हैं। इसमें कोई शक नहीं। कुछ किसानों की नासमझी की भेंट दूसरे किसान और आमजन चढ़ जाते हैं। हरियाणा के अलग-अलग जिलों में हजारों एकड़ गेहूं की फसल और फांस जल गईं। शाम के वक्त कुछ किसानों ने फांस जलाने के लिए आग लगाई थी। इसी बीच चली तेज आंधी ने उस आग को ऐसा भड़काया कि जिसने आग लगाई , उसके खेत को पार करते हुए ये ज्वाला गांव-गांव , खेत-खेत में पहुंच गई। उन किसानों का क्या कुसूर था , जिन्होंने जमीन को बचाने के लिए फांस को जलाया नहीं। गेहूं की फसल उनकी खेतों में ही थी। रातभर वे दौड़ते रहे। कोई लाठी से तो कोई जैली से आग बुझाने का भरसक प्रयास कर रहा था। फायर ब्रिगेड की गाड़ियां हर जगह नहीं पहुंच सकीं। रात उनकी काली कटी , दिन बुझा-बुझा रहा। आग किसी ने लगाई, पर्यावरण किसी ने बिगाड़ा..नाम आंधी का हो गया।

प्रचार इतना किया कि अनचाहा दाग लगा
हिंद के लिए पानीपत की जमीन पर मराठों ने अपने सिर कटाए। उसी पानीपत की धरती पर हिंद की चादर गुरु तेग बहादुर का प्रकाश पर्व भव्य रूप से मनाया गया। पक्ष हो या विपक्ष, सभी नेताओं ने यहां माथा टेका। लाखों की संख्या में संगत पहुंची। पूरे आयोजन के संयोजक सांसद संजय भाटिया ने एक बार फिर से बड़े कार्यक्रम में अपनी छाप छोड़ी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संदेश पढ़कर सुनाया। पानीपत को खूब सजाया भी गया। पर इस सजावट में एक अनचाहा दाग भी लगा। इससे बचा जा सकता था। जीटी रोड पर फ्लाईओवर के पिलर को खूबसूरत पेंटिंग से सजाया गया था। कुछ जनप्रतिनिधियों के चहेतों ने इस पेंटिंग के ऊपर अपने और नेताओं के फोटो के बैनर लगा दिए। कुछ ने कागज तक चिपका दिए। फ्लाईओवर के बीच में तो भव्य बैनर लगाने ठीक थे लेकिन पिलरों की खूबसूरती बिगाड़कर प्रचार करना तो गलत बात है।

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