केसीआर के नेतृत्व वाले बीआरएस के तीसरे मोर्चे से कांग्रेस को होगा सबसे ज्यादा नुकसान
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने हाल ही में एक संबोधन में, 2024 के लोकसभा चुनावों में तीसरा मोर्चा स्थापित करने की अपनी तत्परता का संकेत दिया।

हैदराबाद,27 दिसंबरः तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने हाल ही में एक संबोधन में, 2024 के लोकसभा चुनावों में तीसरा मोर्चा स्थापित करने की अपनी तत्परता का संकेत देते हुए, लाल किले पर अपनी पार्टी के गुलाबी झंडे को फहराए जाने का विश्वास व्यक्त किया। केसीआर ने हाल ही में अपनी पार्टी का नाम तेलंगाना राष्ट्र समिति से बदलकर भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) कर दिया है और तब से विभिन्न राज्यों में विभिन्न दलों के साथ बैठकें कर रहे हैं।
आगामी चुनाव को लेकर प्रमुख राजनीतिक दलों की तैयारियां जोरों पर हैं। जहां भाजपा के पास अपना ठोस वोट बैंक है, वहीं बीआरएस कांग्रेस पार्टी को नुकसान पहुंचा सकती है। केसीआर गठबंधन को मिलने वाले वोट कांग्रेस को प्रभावित करेंगे। इसके अलावा 2024 के चुनाव में ममता बनर्जी का रुख भी अहम है, जो वक्त के साथ ही पता चलेगा। केसीआर ने 14 दिसंबर, 2022 को दिल्ली में बीआरएस कार्यालय का उद्घाटन किया। इससे पहले उन्हें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और पंजाब के सीएम भगवंत मान समेत बड़े नेताओं के साथ देखा गया था।
उद्घाटन के मौके पर नए पार्टी कार्यालय में कई किसान संगठन भी नजर आए। क्या केसीआर 2024 के लिए तीसरे मोर्चे की तैयारी कर रहा है? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तीसरे मोर्चे को तैयार करने के लिए केसीआर लगातार अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्रियों और नेताओं से मिलते रहे हैं, जिससे कांग्रेस को आगामी चुनावों में काफी नुकसान हो सकता है।
मोर्चा भले ही भाजपा के वोट बैंक को प्रभावित न करे, लेकिन भाजपा और कांग्रेस के बीच भ्रमित मतदाताओं को निश्चित रूप से प्रभावित करेगा, क्योंकि वे इसे एक विकल्प के रूप में देखेंगे और उसी को वोट देंगे, जिसका नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ेगा। उत्तर प्रदेश और बिहार में यादव, मुस्लिम और ओबीसी मतदाता अखिलेश यादव और नीतीश कुमार के साथ निकटता से जुड़े हुए हैं, जिनके बीआरएस के साथ गठबंधन में आने की संभावना है।
इससे कांग्रेस को भी बड़ा नुकसान होगा जो अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है, क्योंकि दोनों राज्यों में बीजेपी का अपना वोट बैंक भी है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की तरह केसीआर सिर्फ बीजेपी के लिए वोट काटने का जरिया बनकर काम करेंगे। केसीआर ऐसी रणनीति बनाने में लगे हैं, जो अगर काम करती तो देश की मौजूदा राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती थी। चुनाव आयोग ने बीआरएस को एक राष्ट्रीय पार्टी घोषित किया, जिसके बाद केसीआर ने औपचारिक रूप से 9 दिसंबर को हैदराबाद में पार्टी का गुलाबी झंडा फहराया। केसीआर ने उस संबोधन में, "अबकी बार किसान सरकार" का नारा बुलंद किया और देश में आर्थिक, पर्यावरण, जल, बिजली और महिला सशक्तिकरण नीतियों की आवश्यकता को रेखांकित किया। ये सभी कदम दृढ़ता से संकेत देते हैं कि केसीआर तीसरे मोर्चे के निर्माण में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं।












Click it and Unblock the Notifications