आपदा प्रभावित परिवारों को जयराम सरकार देगी मुफ्त राशन और गैस कनेक्शन, कांग्रेस ने पूछा- बजट कहां से आएगा?

शिमला, 13 जुलाई। चुनावों से पहले हिमाचल सरकार ने अपनी एक खास योजना के तहत प्राकृतिक आपदा से प्रभावित होने वाले लोगों के लिये विशेष सहायता देने की योजना शुरू कर दी है। जिसके तहत सरकार इसी माह से बादल फटने और भारी बारिश से प्रभावित परिवारों को मुफ्त राशन और गैस कनेक्शन मुहैया कराएगी। लेकिन कांग्रेस पार्टी को लगता है कि यह महज चुनावी घोषणा है और सरकार लोगों को गुमराह करने के लिये बिना बजट की योजनाओं को ला रही है।

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दरअसल, पिछले दिनों खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेंद्र गर्ग की ओर से आपदा पीड़ितों के लिए मुफ्त राशन प्रदान करने का एक प्रस्ताव रखा गया। इस पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सहमति जताते हुए पीड़ितों को मुफ्त राशन मुहैया कराने का निर्णय लिया। राज्य सरकार निर्णय के तहत, बादल फटने और भारी बारिश से प्रभावित परिवारों को मुफ्त राशन और गैस कनेक्शन मुहैया कराएगी। सरकार का दावा है कि आपदा प्रभावितों की हर संभव सहायता की जा रही है। इसके साथ ही खाद्य एवं आपूर्ति विभाग प्रभावित परिवारों को मुफ्त चावल, आटा, दाल, रिफाइंड तेल, नमक और गैस सिलेंडर उपलब्ध कराएगा।

लेकिन, नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुये कहा कि सरकार चुनाव नजदीक आते देख लोगों को गुमराह करने के लिये बिना बजट की घोषणाओं में लगी है। उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं कि जब इसके लिये बजट में ही प्रावधान नहीं किया गया है। तो इसके लिये पैसा कहां से आयेगा। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर आजकल मंच पर कार्यकर्ताओं द्वारा दी जा रही चिट पर घोषणाएं कर रहे हैं। घोषणाओं से पहले जमीनी रिपोर्ट नहीं ली जा रही है और घोषणाओं के बाद फाइल मंगवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि लोगों को मूर्ख बनाया जा रहा है। प्रदेश के हालात ऐसे हैं कि पहले ही गरीबों को सरकारी डिपूओं पर समय पर राशन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जो मिल रहा है वह घटिया है। उन्होंने कहा कि चुनावों के लिये तीन महीने बचे हैं। सरकार को आपदा प्रभावितों की याद अब आ रही है। जबकि हिमाचल में सारा साल आपदा आती रहती है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण लोग प्रभावित होते रहे हैं। लेकिन उन्हें राहत मैन्युअल के तहत जो राशि मदद के तौर पर दी जाती है। वह नाममात्र है। सरकार को चाहिए था कि राहत मैन्यूल में सुधार करती । उन्होंने कहा कि सरकार की गलत नीतियों की वजह से आपदा प्रभावितों को राहत मैन्यूल के तहत पैसा लेने के लिये पटवारी व तहसीलदार के दफ्तरों में महीनों चक्कर काटने पड़ते हैं। जब उसे मुआवजा मिलता है, वह उतना होता है कि उससे ज्यादा वह खर्च कर चुका होता है। लोग जानते हैं वह अब किसी भी झांसे में नहीं आयेंगे।

दरअसल, पिछले दिनों प्रदेश में मानसून के शुरुआत के बाद से भूस्खलन और बादल फटने के कई मामले सामने आए हैं। राज्य में बार-बार बादल फटने से कुल्लू के मणिकरण, बिलासपुर के कुह-मंझवाड़ और चंबा के तीसा में भारी तबाही हुई है। जिससे कई लोग प्रभावित हुये है। चुनावी साल है तो वोट बैंक परर नजर रखते हुये भाजपा सरकार ने यह निर्णय लेकर आपदा प्रभावितों को लुभाने का प्रयास किया है।

राज्य आपदा प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष रणधीर शर्मा ने कहा कि इसमें राजनीति नहीं है। जरूरतमंदों की मदद करना सरकार का दायित्व है। इससे पहले की सरकारों ने इस बारे में सोचा तक नहीं। अक्सर देखा जाता है कि लोगों को आपदा में भारी नुकसान होता है और उन्हें समुचित मदद नहीं मिल पाती । लिहाजा अब राशन सरकार देगी , तो कम से कम संकट काल में लोग पेट भर रोटी खा सकेंगे। उन्होंने कहा कि आपदा पीड़ितों की मदद के लिए जिला, पुलिस प्रशासन, होमगार्ड और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के जवानों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। शर्मा ने लोगों से नदी, जलाशयों और नालों के पास नहीं जाने की अपील की है।

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