'तेलंगाना विलय दिवस' का राजनीतिक लाभ लेने के लिए राजनीतिक पार्टियों में होड़
17 सितंबर को तेलंगाना का भारतीय संघ में विलय हुआ था, ऐसे में राज्य सरकार ने ऐलान किया है कि वो इस दिन भव्य कार्यक्रम आयोजित करेगी। हालांकि अन्य राजनीतिक दलों में भी इसका लाभ लेने की होड़ मची हुई है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस मामले में सबसे आगे है। उसने एक बार फिर परेड ग्राउंड में मुक्ति दिवस नामक एक "आधिकारिक" कार्यक्रम की घोषणा की है। इससे साफ हो रहा कि वो बीआरएस और कांग्रेस के साथ इस दिन को मनाने को लेकर प्रतिस्पर्धा कर रही।

भाजपा 17 सितंबर को हैदराबाद मुक्ति दिवस के रूप में मना रही है। पिछले साल केंद्र ने आधिकारिक तौर पर इस कार्यक्रम को मनाया था और परेड ग्राउंड में एक सार्वजनिक बैठक आयोजित की थी। जिसमें अमित शाह भी शामिल हुए थे। इस बार भी पार्टी बड़ा आयोजन करने की योजना बना रही है।
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस भी इसका राजनीतिक लाभ लेना चाहती है। मतदाताओं को लुभाने और राजनीतिक लाभ लेने के लिए वो रैली और सार्वजनिक बैठक सहित कई कार्यक्रमों की योजना बना रही। 16 सितंबर को केंद्रीय कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक से शुरुआत करते हुए, कांग्रेस 17 सितंबर को तुक्कुगुडा में एक सार्वजनिक बैठक आयोजित करेगी। जिसमें सोनिया गांधी द्वारा इस अवसर पर पार्टी की 'पांच गारंटी' की घोषणा करने की उम्मीद है।
मामले में टीपीसीसी के उपाध्यक्ष जी निरंजन ने कहा कि बीजेपी का जब अस्तित्व नहीं था, तो ये विलय हुआ था। इसमें कांग्रेस की भूमिका थी, अब बीजेपी इसका लाभ लेने के लिए कूद रही है।












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