कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया- खनिजों पर रॉयल्टी में संशोधन का कोई प्रस्ताव नहीं आया
ओडिशा सरकार केंद्र सरकार से खनिजों की रॉयल्टी को संशोधित करने की बार-बार मांग कर रही है, वहीं केंद्रीय खान एवं कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने दावा किया कि कार्रवाई की व्यवस्था शुरू होने के बाद कोई भी ऐसा प्रस्ताव नहीं है। ये बात राज्यसभा में बीजेडी सांसद सस्सित पात्रा द्वारा पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए कही।

मंत्री जोशी ने राज्य सभा में बताया कि खान मंत्रालय द्वारा खनिजों जिसमें कोयला, लिग्नाइट, भंडारण के लिए रेत और छोटे खनिजों के अलावा अन्य खनिजों को रॉयल्टी दरों और डेड रेंट के संशोधन का मूल्यांकन फरवरी में किया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा 9, 2018 को एक रिसर्च ग्रुप तैयार किया गया है।
इसके अंतर्गत खनिज समृद्ध राज्यों के प्रतिनिधि और खनन उद्योग, संघों, महासंघों के प्रतिनिधि शामिल थे। रिसर्च टीम ने 25 जुलाई, 2019 को अपनी आखिरी सिफारिश पेश की थी।
12 जनवरी, 2015 को एमएमडीआर अधिनियम, 1957 में संशोधन के जरिए नीलामी व्यवस्था की शुरुआत के बाद से कुल 330 खनिज ब्लॉकों का अवलोकन किया गया। की नीलामी हो चुकी है जिनमें से अधिकांश खदानें अभी तक चालू नहीं हुई हैं।
मंत्री ने बताया बीते चार सालों के दौरान राज्य सरकारों को मिलने वाली रॉयल्टी तीन गुना से अधिक हो गई है। नीलाम की गई खदानों के चालू होने से सभी खनिज समृद्ध राज्यों में खनिज क्षेत्र से राजस्व में वृद्धि का रूझान जारी रहेगा। इस वजह है कि अधिकांश नीलाम की गई खदानें अभी भी उत्पादन चरण में नहीं आई हैं, इसलिए डाउनस्ट्रीम उद्योग पर वर्तमान रॉयल्टी दरों का प्रभाव इस स्तर पर निर्धारित नहीं किया जा सकता है। ये ही कारण है कि वर्तान खनिजों के लिए रॉयल्टी की दरों को संशोधित करना संभव नहीं है।
बीजेडी के पात्रा के सवाल का जवाब देते हुए मंत्री ने ये भी जानकारी दी कि बीते पांच सालों में प्रमुख खनिजों से रॉयल्टी अर्जित करने में 2017-18 से 2021-22 तक 17 खनिज वाले राज्यों से 38,840.54 करोड़ रुपये इकट्ठा किए हैं। सबसे ज्यादा 17,983.69 करोड़ रुपये ओडिशा से जुटाए गए हें।












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