कृष्णा नदी के जल में आंध्र के हितों के साथ समझौता नहीं, लेंगे अपना पूरा हिस्सा : सीएम जगन
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम केसीआर ने कहा है कि कृष्णा नदी के जल में राज्य के हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सीएम ने वादा किया है राज्य का पूरा हिस्सा लिया जाएगा। मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने इसको लेकर संबंधित अधिकारियों को नई शर्तों के साथ आंध्र प्रदेश की आपत्तियों के साथ एक बार फिर प्रधान मंत्री और गृह मंत्री को पत्र लिखने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर करने के राज्य सरकार के फैसले और KWDT-II के लिए नए टीओआर को लेकर आंध्र सरकार ने उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। जिसमें जल संसाधन मंत्री अंबाती रामबाबू, विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और कानूनी विशेषज्ञ शामिल हुए। बैठक में केंद्रीय कैबिनेट के फैसले को चुनौती बछावत ट्रिब्यूनल अवार्ड द्वारा किए गए आवंटन के अनुसार कृष्णा बेसिन राज्यों के बीच नदी जल वितरण और केडब्ल्यूडीटी-II रिपोर्ट के अनुसार राज्य को होने वाले नुकसान पर विस्तार से चर्चा की गई।

वहीं सीएम जगन ने साफ कहा है कि वाईएसआरसी सरकार राज्य के हितों से कोई समझौता नहीं करेगी। अगर ऐसी स्थित आई कि प्रदेश के हित प्रभावित हो रहे हैं, तो कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सीएम ने ऐसे में आंध्र प्रदेश की आपत्तियों को उजागर करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री को पत्र लिखने का निर्देश दिया।
इस संबंध में सीएम जगन ने अधिकारियों सख्त निर्देश दिया कि समझौता के साथ राज्य की हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। एक आधिकारिक बयान में आंध्र प्रदेश सरकार ने कहा कि शर्तें जारी करने और राजपत्र जारी करने को राज्य के लिए हानिकारक बताया गया और इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका दायर करने के साथ अधिकारियों ने इस बार जोर दिया कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम यह कहता है कि कृष्णा नदी के जल बंटवारे को राज्य के विभाजन से पहले लागू की गई वितरण योजना का पालन करना चाहिए।












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