हूल दिवस: सिद्धो-कान्हू को श्रद्धांजलि देने भोगनाडीह जाएंगे सीएम हेमंत, यहीं हुआ था क्रांतिकारियों का जन्म
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन हूल दिवस के मौके पर शहीद सिद्धो-कान्हू को श्रद्धांजलि देने उनके पैतृक गांव भोगनाडीह जाएंगे। भोगनाडीह संताल परगना प्रमंडल अंतर्गत साहिबगंज जिले के बरहेट प्रखंड में अवस्थित है। मुख्यमंत्री के भोगनाडीह दौरे को लेकर जिला प्रशासन ने पुख्ता तैयारी की है। सुरक्षा के भी चाक-चौबंद इंतजाम हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहली बार रेलमार्ग से साहिबगंज के बरहड़वा पहुंचे।
यहां उपायुक्त और जिला पुलिस अधीक्षक सहित अन्य पदाधिकारियों और झामुमो कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। मुख्यमंत्री आज भोगनाडीह में स्वतंत्रता सेनानी सिद्धो, कान्हू, चांद और भैरव की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

30 जून 1855 को शुरू हुआ था संताल हूल
गौरतलब है कि 30 जून 1855 को भोगनाडीह मैदान में ही सिद्धो, कान्हू, चांद और भैरव नाम के 4 आदिवासी भाइयों के नेतृत्व में संताल आदिवासियों ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सरकार और महाजनी एवं साहूकारी व्यवस्था के खिलाफ हथियार उठाने का फैसला किया था। भोगनाडीह मैदान में 30 जून को तकरीबन 10 हजार की संख्या में संताल आदिवासी सहित अन्य जातीय समुदाय के लोग इकट्ठा हुए थे। इसे संताल हूल का नाम दिया गया। यह आंदोलन बहुत जल्द झारखंड के संताल परगना प्रमंडल, बिहार के भागलपुर और पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिलों तक फैल गया। बाद में अंग्रेजी हुकूमत ने संताल हूल का दमन कर दिया। कान्हू, चांद और भैरव शहीद हो गए। सिद्धो को बरहेट प्रखंड के ही पंचकठिया नामक स्थान पर फांसी दे दी गई। आंदोलन का तो दमन कर दिया गया लेकिन उसकी गूंज लंबे समय तक सुनाई दी। इसी की याद में 30 जून को हूल दिवस मनाया जाता है।
प्रतिवर्ष भोगनाडीह गांव में होता है सरकारी कार्यक्रम
मौजूदा समय में भोगनाडीह गांव में शहीद क्रांतिकारी सिद्धो-कान्हू के वंशजों की 8वीं पीढ़ी रहती है। झारखंड सरकार की ओर से वंशजों को गांव में ही पक्का मकान बना कर दिया गया है। जिस मैदान में संताल हूल की रूपरेखा तय की गई थी वहां अब पार्क का निर्माण किया गया है। शहीद सिद्धो, कान्हू, चांद और भैरव की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। गांव में एकलव्य विद्यालय और वोकेशनल ट्रेनिंग कॉलेज की स्थापना की गई है। प्रतिवर्ष राज्य सरकार की ओर से भोगनाडीह गांव में कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। परिसंपत्तियां वितरित की जाती है।












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