RBI Monetary Policy Today: रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं, सरकार ने विदेशी निवेशकों को दी टैक्स से पूरी राहत
RBI Policy Meeting Today: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक पूरी हो चुकी है और अब देशभर की निगाहें शुक्रवार, 5 जून को होने वाले बड़े ऐलान पर टिकी हैं। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा सुबह 10 बजे मौद्रिक नीति का फैसला सुनाएंगे।
इस बीच बाजार, बैंकिंग सेक्टर, उद्योग जगत और आम लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव होगा या फिर इसे मौजूदा स्तर पर ही बरकरार रखा जाएगा।

अधिकांश अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि RBI फिलहाल रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रख सकता है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये पर बढ़ते दबाव और महंगाई के संभावित जोखिमों को देखते हुए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में मामूली बढ़ोतरी का विकल्प भी चुन सकता है।
रेपो रेट पर क्या है अनुमान?
मौजूदा समय में RBI की प्रमुख नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट 5.25 प्रतिशत है। बाजार की आम राय है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल वेट एंड वॉच की रणनीति अपनाएगा और दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यदि रुपये की कमजोरी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है तो RBI भविष्य में दरों को लेकर सख्त रुख अपना सकता है। ऐसे में आज की नीति घोषणा में गवर्नर की टिप्पणियों पर भी विशेष नजर रहेगी।
रुपये की कमजोरी बनी बड़ी चिंता
Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक- पिछले एक साल में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 10 प्रतिशत से अधिक कमजोर हुआ है। यही वजह है कि इस बार RBI की बैठक में विनिमय दर (Exchange Rate) एक प्रमुख मुद्दा बनकर उभरी है।
रुपये को संभालने के लिए RBI ने पिछले महीनों में कई कदम उठाए हैं। इनमें विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की बिक्री, फॉरवर्ड मार्केट में हस्तक्षेप, स्वैप विंडो और विशेष नीलामियां शामिल हैं। इसके अलावा सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए भी नियमों को सख्त किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के लिए RBI ने कुछ मात्रा में सोने की बिक्री जैसे कदमों का भी सहारा लिया है।
क्या रुपया वास्तव में कमजोर है?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में संकेत दिया था कि केंद्रीय बैंक की नजर में रुपया फिलहाल अंडरवैल्यूड यानी वास्तविक मूल्य से नीचे है। उन्होंने रुपये के रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट (REER) का जिक्र करते हुए बताया था कि अप्रैल में यह घटकर 90.96 पर पहुंच गया, जो सितंबर 2013 के बाद का सबसे निचला स्तर है। REER किसी मुद्रा की वास्तविक प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को मापने का एक महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है।
पश्चिम एशिया संकट का भी असर
RBI का यह फैसला ऐसे समय में आने जा रहा है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल रहा है। क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक संकट के कारण कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर महंगाई, व्यापार घाटे और रुपये पर पड़ सकता है। यही वजह है कि MPC की बैठक में वैश्विक परिस्थितियों पर भी विशेष चर्चा हुई है।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
यदि RBI रेपो रेट को स्थिर रखता है तो फिलहाल होम लोन, कार लोन और अन्य कर्जों की EMI में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। वहीं अगर भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाई जाती हैं तो बैंकों के कर्ज महंगे हो सकते हैं। दूसरी ओर, जमा योजनाओं और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना भी बढ़ सकती है।
अब सभी की नजरें RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं। सिर्फ रेपो रेट ही नहीं, बल्कि महंगाई, आर्थिक विकास, रुपये की स्थिति और वैश्विक जोखिमों को लेकर RBI का दृष्टिकोण भी बाजार की दिशा तय करेगा। ऐसे में आज का मौद्रिक नीति फैसला देश की अर्थव्यवस्था, बैंकिंग सेक्टर और करोड़ों कर्जदारों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।














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