'9 साल बाद गहरी नींद से जागा केंद्र', कृष्णा नदी जल बंटवारे पर बोले मंत्री टी हरीश
कृष्णा नदी जल बंटवारे पर केंद्र सरकार के निर्णय को सीएम के चंद्रशखर सरकार में मंत्री टी हरीश ने तेलंगाना की जीत बताया है। उन्होंने कहा कि तेलंगाना कृष्णा नदी के जल बंटवारे की मांग लंबे लंबे समय से कर रहा था, लेकिन 9 साल बाद केंद्र की बीजेपी नेतृत्व वाली सरकार की नींद टूटी। टी हरीश ने केंद्र के इस फैसले को लेकर उम्मीद जताई कि इससे अविभाजित महबूबनगर जिले को लाभ होगा, जो कि कृष्णा नदी के जल से वंचित हो गया था।
तेलंगाना के वानापर्थी जिले में एक कार्यक्रम में मंत्री टी हरीश ने कहा कि अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 की धारा 5(1) के तहत मौजूदा कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण-II के लिए आगे की शर्तों के मुद्दे को मंजूरी देने का केंद्रीय मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया है। जिसके बाद अब तेलंगाना और आंध्र प्रदेश दोनों राज्यों को कृष्णा नदी के जल में उचित हिस्सा मिलेगा।

मंत्री आगे कहा कि ये निर्णय पहले भी लिया जा सकता है। लेकिन केंद्र ने पिछले कई वर्षों से इस तेलंगाना की इस मांग पर ध्यान ही नहीं था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव ने केंद्र को कई पत्र लिखे। कई बार प्रधान मंत्री और जल संसाधन मंत्री से मुलाकात भी की। बाद में इसको लेकर राज्य सरकार को उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
तेलंगाना सरकार के मंत्री ने कहा कि केंद्र ने ट्रिब्यूनल गठित करने का वादा किया था। ऐसे में राज्य सरकार ने केंद्र पर विश्वास किया और मामला वापस ले लिया लेकिन कोई निर्णय नहीं लिया गया। मंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र ये चाहता था कि तेलंगाना अपनी मांग वापस ले ले। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार नौ साल बाद गहरी नींद से जागकर तेलंगाना की मांग पर निर्णय ले रही है। उन्होंने तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बीच कृष्णा नदी जल बंटवारे के मुद्दे को मौजूदा कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण-II को सौंपने का निर्णय को तेलंगाना के लोगों की जीत बताया।
बता दें कि आईएसआरडब्ल्यूडी अधिनियम की धारा 3 के तहत पार्टी राज्यों द्वारा किए गए अनुरोध पर केंद्र द्वारा 2004 में कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण-द्वितीय का गठन किया गया था। इसके बाद, तेलंगाना 2014 में अस्तित्व में आया। आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 89 के अनुसार, एपीआरए, 2014 की उक्त धारा के खंड (ए) और (बी) को संबोधित करने के लिए केडब्ल्यूडीटी-II का कार्यकाल बढ़ाया गया था।












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