तेलंगाना के पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में अस्तित्व के लिए जूझ रही भाजपा
कांग्रेस की हालत पहले ही एक ऐसी पार्टी की है, जो एक बंद चैप्टर की तरह है। वहीं, बीजेपी या तो तेलुगु देशम पार्टी, या फिर जन सेना या दोनों के साथ जुड़कर खुद के प्रासंगिक बने रहने के लिए संघर्ष कर रही है।

अमरावतीः तेलंगाना के पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में राजनीतिक परिदृश्य काफी दिलचस्प हो रहा है, जहां कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों ही अस्तित्व के संकट का सामना कर रही हैं। कांग्रेस की हालत पहले ही एक ऐसी पार्टी की है, जो एक बंद चैप्टर की तरह है। वहीं, बीजेपी या तो तेलुगु देशम पार्टी, या फिर जन सेना या दोनों के साथ जुड़कर खुद के प्रासंगिक बने रहने के लिए संघर्ष कर रही है।
वहीं अब, भारत राष्ट्र समिति (BRS) के आंध्र प्रदेश की राजनीति में प्रवेश करने के साथ ही भाजपा के लिए मुश्किल और बढ़ गई है। एक दो विधानसभा क्षेत्रों को छोड़कर, भाजपा पूर्ववर्ती आंध्र प्रदेश में कभी भी एक मजबूत ताकत नहीं रही है। राज्य के बंटवारे के बाद भी उसकी स्थिति नहीं बदली, बल्कि बद से बदतर होती चली गई। तेलुगु देशम पार्टी और जन सेना के साथ गठबंधन करके, भाजपा ने 2014 के विधानसभा चुनावों में चार विधानसभा सीटें जीतीं। लेकिन, 2019 के विधानसभा चुनावों तक वह इनमें से एक सीट भी बरकरार नहीं रख सकी और वोट शेयर 2014 में 4.13 प्रतिशत से घटकर 2019 में 0.96 प्रतिशत हो गया। यह नोटा के वोट शेयर से भी कम था, जो 1.5 प्रतिशत रहा।
हालांकि तेदेपा अध्यक्ष एन चंद्रबाबू नायडू और जेएसपी प्रमुख पवन कल्याण दोनों ही भाजपा के साथ तालमेल बिठाने के लिए तैयार हैं, लेकिन बाद में अपनी-अपनी वजहों से टाल-मटोल करते रहे हैं। साफ साफ देखा जाए तो ये दोनों नेता तेजी से अपना धैर्य खो रहे हैं और माना जा रहा है कि वे अपनी योजनाओं के साथ आगे बढ़ने की फिराक में हैं, भले ही भाजपा उनके साथ शामिल होने के लिए तैयार हो या नहीं। यह भी कहा जा रहा है कि नायडू भाजपा की तुलना में पवन कल्याण को तरजीह दे रहे हैं।
टीडीपी के एक सूत्र ने बताया, 'आंध्र प्रदेश में जाति और धार्मिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए, पवन कल्याण का साथ टीडीपी प्रमुख के लिए बीजेपी की तुलना में अधिक प्रासंगिक है। बीजेपी भी कापू समुदाय को लुभाने और आंध्र प्रदेश में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए पवन कल्याण के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए हुए है, लेकिन अभी तक उसे इसमें कामयाबी नहीं मिली है।'












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