ओडिशा में BJD ने शुरू की आम चुनाव की तैयारी
भुवनेश्वर,12 सितंबरः आगामी आम चुनाव को देखते हुए आडिशा में बीजू जनता दल (BJD) ने अपने सांगठनिक कार्य को तेज कर दिया है। मार्च-अप्रैल 2024 में नहीं बल्कि अक्टूबर-नवंबर 2023 में आम चुनाव कराने की संभावना को देखते हुए बीजद
भुवनेश्वर,12 सितंबरः आगामी आम चुनाव को देखते हुए आडिशा में बीजू जनता दल (BJD) ने अपने सांगठनिक कार्य को तेज कर दिया है। मार्च-अप्रैल 2024 में नहीं बल्कि अक्टूबर-नवंबर 2023 में आम चुनाव कराने की संभावना को देखते हुए बीजद ने अभी से अपनी तैयारी शुरू कर दी है।

प्रभारी व सहप्रभारी की नियुक्ति की योजना
2019 के आम चुनावों के बाद से बीजेपी (BJP) के केंद्रीय नेतृत्व के साथ अच्छे संबंध बनाकर बीजद अप्रत्यक्ष रूप से राज्य में बीजेपी संगठन को कमजोर करने के साथ ही एक के बाद एक चुनावी सफलता हासिल कर रही है। ऐसे में आगामी आम चुनावों को देखते हुए बीजू जनता दल को डर सता है कि चुनाव से पहले बीजेपी अपनी रणनीति बदल सकती है और आक्रामक रुख अख्तियार कर सकती है। ऐसे में आगामी दिनों में भाजपा के ओडिशा में आक्रामक रुख ध्यान में रखते हुए बीजद ने अपने तीन फ्रंट संगठनों (छात्र, युवा और महिलाओं) को तीन साल की निर्धारित अवधि से बहुत पहले पुनर्गठित किया है। अब जिला कमेटी के पुनर्गठन के साथ ही निर्वाचक मंडलवारी प्रभारी और सहप्रभारी को नियुक्त करने की योजना बनाई है।
बीजद ने इन्हें किया पुनर्गठित
2023 के अंत में अगले आम चुनाव की संभावना को देखते हुए बीजू जनता दल अपने संगठन का पुनर्गठन कर रहा है। इसके लिए बीजू जनता दल ने अपने तीन फ्रंट संगठनों यानी छात्र, युवा और महिला टीम को भंग करते हुए पुनर्गठित किया है। हालांकि पार्टी के नेता इसके बारे में अपना मुंह नहीं खोल रहे हैं, मगर माना जा रहा है पार्टी ने आम चुनाव से पहले अपनी संगठनात्मक प्रक्रिया पूरी कर लोगों के पास जाने की तैयारी कर रही है। पिछले 2019 आम चुनाव के कारण बीजद ने अपनी संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया एक साल की देरी से किया था। छात्र और युवा बीजद समिति का पुनर्गठन सितंबर 2020 में किया गया था, जबकि महिला समिति की घोषणा जुलाई 2020 में की गई थी।
शुरू की नियुक्ति की प्रक्रिया
इसी तरह बीजद की अधिकांश संगठनात्मक जिला समितियों को 2021 में पुनर्गठित किया गया था। पार्टी के संविधान के अनुसार इन समितियों को कम से कम तीन साल काम करना चाहिए, लेकिन पार्टी ने जिला समितियों को पुनर्गठित करने का निर्देश दिया है। पार्टी ने जिला समितियों के पुनर्गठन की प्रक्रिया को एक साल से डेढ़ साल के भीतर पूरा करने का फैसला किया है, जिसका उद्देश्य फरवरी 2023 से पहले लगातार नौवीं बार बीजद सुप्रीमो और मुख्यमंत्री नवीन पटनायक (Naveen Patnaik) को पार्टी अध्यक्ष के रूप में चुनने की प्रक्रिया को पूरा करना है। इसके अलावा पार्टी का पदयात्रा कार्यक्रम भी अगले दो अक्टूबर से शुरू होने जा रहा है। इससे पहले जिला समितियों के गठन, जिला पर्यवेक्षकों के पुनर्गठन, निर्वाचन क्षेत्र प्रमुखों और सह-प्रमुखों (छात्रों, युवाओं और महिलाओं सहित) की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
काबिल नेताओं को दी जाएगी जिम्मेदारी
इस बीच, बीजद सुप्रीमो पटनायक ने पार्टी के छह नेता अर्थात प्रसन्न आचार्य, देवी प्रसाद मिश्रा, प्रमिला मलिक, निरंजन पुजारी, प्रताप जेना और महेश्वर मोहंती को पिछले अगस्त में कुल 30 जिलों के संगठन प्रभारी वरिष्ठ व पर्यवेक्षक के तौर पर नियुक्त किया। हालांकि, प्रमिला मलिक और प्रताप जेना पहले क्रमशः खुर्दा और कंधमाल जिलों के प्रभारी थे। अब उक्त दोनों जिलों में कोई पर्यवेक्षक नहीं है। सौभाग्य नायक (बुद्ध), सुधीर कुमार सामल (बारगढ़), विजय नायक (ढेंकनाल), तुषारकांति बेहरा (नवरंगपुर), नलिनीकांत प्रधान (संबलपुर) जो 30 जिलों के पर्यवेक्षक के रूप में काम कर रहे हैं, का प्रदर्शन अच्छा नहीं है, उन्हें बदल दिया जाएगा। पार्टी की ओर से और कुछ काबिल नेताओं को इनकी जगह पर जिम्मेदारी दी जाएगी।
संगठनात्मक कार्यक्रम तेज करेगी बीजद
इसके अलावा, पार्टी के महासचिव संजय दासवर्मा और अरुण साहू किसी भी संगठनात्मक जिम्मेदारी में नहीं हैं, इसलिए पार्टी का दायित्व है कि चुनाव से पहले उन्हें संगठन के काम में समायोजित करें। मंत्री उषा देवी को भी इस निगरानी सूची से बाहर रखे जाने की संभावना है। प्रदेश में भाजपा की बदली हुई रणनीति और दृष्टिकोण को देखते हुए इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद सरकारी बैनर पर बीजद सुप्रीमो व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को लेकर अपने संगठनात्मक कार्यक्रम को बीजद और तेज करने की चर्चा हो रही है।












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