केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया से मिला BJD सांसदों का प्रतिनिधिमंडल, आशा वर्करों के लिए की न्यूनतम वेतन की मां
भुवनेश्वर, दिसंबर 18। BJD के राज्यसभा सांसद सुभाष चंद्र सिंह के नेतृत्व में पार्टी के पांच सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल शनिवार को दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मंडाविया से मिला। इस दौरान इस प्रतिनिधिमंडल ने आशा कार्यकर्ताओं के लिए न्यूनतम मजदूरी और उनकी नौकरियों को नियमित करने की मांग को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। इस प्रतिनिधिमंडल में सुभाष चंद्र सिंह के अलावा सांसद महेश साहू, प्रमिला बिसोई, मंजुलता मंडल और चंद्रानी मुर्मू भी थे।

ज्ञापन ने मंत्री का ध्यान इस तथ्य की ओर आकर्षित किया कि कोविड महामारी के प्रकोप के बाद से अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के रूप में आशा कार्यकर्ताओं का महत्व काफी बढ़ गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि काम के अतिरिक्त बोझ के बावजूद, उनके पारिश्रमिक में पर्याप्त वृद्धि नहीं हुई है और अक्सर वेतन में भी देरी हो जाती है।
यह इस तथ्य से जुड़ा है कि इन श्रमिकों को 'मानद' के रूप में नामित किया गया है और उन्हें केवल 2,000 रुपये का मासिक मानदेय प्रदान किया जाता है और इसलिए वे न्यूनतम मजदूरी प्राप्त करने के पात्र नहीं हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि भारत के सातवें वेतन आयोग के अनुसार कुशल श्रमिकों के लिए मासिक वेतन दर 18,000 रुपये तय करने के बावजूद, उन्हें मुश्किल से इतना ही मिलता है। ज्ञापन में कहा गया है कि उन्हें वास्तविक श्रमिकों के रूप में पहचानने में विफलता महिलाओं द्वारा किए गए काम के अवमूल्यन के सामान्य रवैये को दर्शाती है।
ज्ञापन में आशा कार्यकर्ताओं को एक कार्यकर्ता के रूप में 18,000 रुपये प्रति माह के संशोधित वेतन (न्यूनतम वेतन), सेवानिवृत्ति लाभ, सामाजिक सुरक्षा लाभ और नौकरियों के नियमितीकरण की मांग की गई।












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