बिहार में पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग की योजनाओं के लिए अब अलग निदेशालय
पटना। बिहार में पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की योजनाओं का क्रियान्वयन अब इस संदर्भ में गठित हो रहे निदेशालय के माध्यम से होगा। कैबिनेट से इस आशय के प्रस्ताव की स्वीकृति के बाद संबंधित विभाग ने शनिवार को एक संकल्प जारी किया है। निदेशालय के लिए 446 पदों के सृजन को स्वीकृति मिली है।

वर्तमान में पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग के लोगों के हित में चलने वाली योजनाओं का संचालन अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) कल्याण विभाग के माध्यम से हो रहा था। इस कारण परेशानी हो रही थी। इस समस्या को ध्यान में रख कर ही नए निदेशालय के गठन का निर्णय लिया गया। इसके स्वरूप को ले दो अक्टूबर को संकल्प जारी किया गया।
पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग के लिए अलग निदेशालय
अधिकारियों व कर्मियों सहित 446 पदों को स्वीकृति
अब तक एससी-एसटी कल्याण विभाग से हो रहा था काम
अधिकारियों के नए पदों का होगा सृजन
मुख्यालय स्तर पर इसके लिए संयुक्त निदेशक, उप निदेशक, सहायक निदेशक, लेखा पदाधिकारी, प्रशाखा पदाधिकारी, सहायक, उच्च वर्गीय व निम्न वर्गीय लिपिक, आशुलिपिक व कार्यालय परिचारी के पद सृजित किए गए हैं। प्रमंडल, जिला व अनुमंडल स्तर पर योजनाओं के कार्यान्वयन एवं पर्यवेक्षण के लिए नौ प्रमंडलीय उप निदेशक, पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण, 38 जिला पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण पदाधिकारी, 101 अनुमंडल पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण पदाधिकारी के पद सृजन को सहमति दी गई है।
जदयू ने की सरकार के फैसले की तारीफ
जदयू की प्रदेश प्रवक्ता भारती मेहता ने सरकार की इस पहल को मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि पिछड़ा व अति पिछड़ा वर्ग के लोगों के लिए सरकार के स्तर पर चलने वाली योजनाओं के निर्बाध क्रियान्वयन में इस पहल से मदद मिलेगी और गति भी आएगी। सरकार के इस फैसले से सरकारी नौकरियों के अवसर भी बढ़ेंगे।












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