आंध्र प्रदेश सरकार ने गंगावरम पोर्ट को अडानी ग्रुप को बेचा, टीडीपी ने डील पर किए सवाल खड़े

विजयवाड़ा, दिसंबर 28। टीडीपी प्रवक्ता के पट्टाभि राम ने राज्य सरकार से ये सवाल किया है कि सरकार ने लाभदायक गंगावरम बंदरगाह की अडानी पोर्ट्स एसईजेड लिमिटेड को 'सीधी बिक्री' क्यों की, जबकि सचिवों की अधिकार प्राप्त समिति ने 'खुली बोली प्रक्रिया' का सुझाव दिया था।

TDP leader

पट्टाभि ने कहा कि 23 अगस्त, 2021 को जारी किए गए GO 12 से पता चला है कि छह शीर्ष आईएएस अधिकारियों वाली समिति ने सीधे बिक्री प्रक्रिया को मंजूरी नहीं दी थी। कमिटी ने ओपन बिड को फायदेमंद बताते हुए कहा था कि उसने कानूनी सलाह और रिटायर्ड जज दीपक मिश्रा की राय पर सीधी बिक्री को मंजूरी दी है।

सोमवार को मीडियाकर्मियों से बात करते हुए, टीडीपी नेता ने कहा कि यदि राज्य सरकार का हिस्सा एक निविदा के माध्यम से बेचा जाता तो इससे अधिक राजस्व प्राप्त होता। उन्होंने कहा कि अडानी पोर्ट्स ने राज्य की 10.40 प्रतिशत हिस्सेदारी सिर्फ 645.10 करोड़ रुपये में हासिल की। पट्टाभि ने दावा किया कि जिस तरह से वाईएसआरसी शासन ने बंदरगाह को बेचा, उससे पूरे लेनदेन में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का संदेह पैदा होता है।

तेदेपा नेता ने कहा कि गंगावरम बंदरगाह का मूल रियायत समझौता 2058 तक प्रभावी रहेगा। इसलिए आंध्र प्रदेश अगले 37 वर्षों के लिए बंदरगाह से सभी संभावित आय को खो देगा।

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