प्राइवेट स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें गरीब बच्चों के लिए रिजर्व करेगी आंध्र प्रदेश सरकार
विजयवाड़ा, दिसंबर 22। आंध्र प्रदेश सरकार ने मंगलवार को हाईकोर्ट के समक्ष ये बात रखी है कि अगले शैक्षणिक सत्र से राज्य सरकार प्राइवेट स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखेगी। राज्य सरकार ने बताया है कि सरकार ये कदम शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अनुसार उठाएगी।

प्रधान सचिव (स्कूल शिक्षा) बी राजशेखर ने अदालत को सौंपे गए एक अतिरिक्त हलफनामे में बताया है कि अभी सरकार योग्य और पात्र छात्रों की पहचान कर रही है। बी राजशेखर ने बताया कि इस काम के लिए एक पोर्टल तैयार किया जाएगा। उन्होंने निजी स्कूलों में आरटीई लागू करने के लिए तीन महीने का समय मांगा। 2017 में अधिवक्ता तांडव योगेश द्वारा दायर एक जनहित याचिका में आरटीई के अनुसार निजी स्कूलों में ईबीसी छात्रों को 25 प्रतिशत आरक्षण की मांग की गई थी, जो मुख्य न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई थी।
शिक्षा विभाग के सरकारी वकील केवी रघुवीर ने अतिरिक्त हलफनामा दाखिल कर तीन महीने का समय मांगा है। अदालत ने मामले की सुनवाई अगले सप्ताह के लिए स्थगित कर दी। हलफनामे में प्रमुख सचिव ने बताया कि आरटीई को लागू करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए सभी संबंधित विभागों के साथ बैठक की गई। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक वर्ष 2021-22 के लिए, निजी स्कूलों में कक्षा 1 के लिए 1.19,550 प्रवेश और आरटीई के अनुसार, 29,887 को आरटीई कोटा के लिए आरक्षित किया जाना चाहिए।
सरकार ने निजी स्कूलों के लिए शुल्क संरचना को अंतिम रूप दिया और 24 अगस्त को आदेश जारी किया। शासनादेश के अनुसार, ग्राम पंचायतों में प्राथमिक विद्यालयों को प्रति वर्ष 10,000 रुपये और उच्च विद्यालयों के लिए 12,000 रुपये प्रति वर्ष, नगर पालिकाओं के स्कूलों के लिए यह शुल्क निर्धारित किया गया था। 11,000 रुपये और 15,000 रुपये था और नगर निगमों में इसे 12,000 रुपये और 18,000 रुपये तय किया गया था।












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