Shivling: क्या है 'शिवलिंग' का सही अर्थ? क्यों मानते हैं इसे शक्ति का प्रतीक?

नई दिल्ली, 16 मई। आज वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे का काम पूरा हो गया है। तीन दिन तक चले इस सर्वे के बाद हिंदू पक्ष के वकील ने दावा किया है कि कुएं के अंदर शिवलिंग मिला है, जिसके बारे में रिपोर्ट मंगलवार को कोर्ट में पेश की जाएगी, जबकि मुस्लिम पक्षकार ने इस दावे को नकारते हुए साफ कहा है कि अंदर ऐसा कुछ भी नहीं मिला है, हिंदू पक्ष इस बारे में झूठ बोल रहा है। फिलहाल शिवलिंग को लेकर दोनों पक्षों में बहस छिड़ी हुई है तो वहीं सोशल मीडिया पर इस बारे में कमेंट्स की बाढ़ आई हुई है।

अब क्या सत्य है और क्या असत्य? इस बारे में तो कोर्ट में ही पता चलेगा लेकिन इसले पहले जानते हैं आस्था के प्रतीक 'शिवलिंग' के बारे में कुछ खास बातें...

शिव ही सत्य है, वो ही ज्ञान है

शिव ही सत्य है, वो ही ज्ञान है

शिव ही सत्य है, वो ही ज्ञान है और वो ही प्रेम भी है। महादेव के नाम से पूज्यनीय 'शिव-शंभू' ही 'शक्ति' का प्रतीक हैं, जिन्हें भोलेनाथ, शंकर, नीलकंठ, भोले भंडारी जैसे नामों से पुकारा जाता है।

शिव-पार्वती के एक रूप होने का प्रतीक

शिव-पार्वती के एक रूप होने का प्रतीक

तो वहीं मां पार्वती शक्ति, प्रेम और समर्पण की पर्याय हैं, जिनकी आशीष में ही सृष्टि फल-फूल रही है तो वहीं 'शिवलिंग' शिव-पार्वती के एक रूप होने का प्रतीक है। जो संसार में पुरुष और स्त्री के अस्तित्व के एक समान होने को व्याखित करता है, जो स्पष्ट करता है कि अकेला पुरुष और अकेली स्त्री सृष्टि का निर्माण नहीं कर सकते हैं। सृष्टि को आकार देने के लिए दोनों की भागीदारी बेहद जरूरी है, एक-दूसरे के बिना दोनों अधूरे हैं।

 'शिवलिंग' को तीन रूपों में बांटा गया है

'शिवलिंग' को तीन रूपों में बांटा गया है

शैव संप्रदाय कहता है कि 'शिवलिंग' 'परशिव', 'पराशक्ति' और 'परमेश्वर' तीन रूपों में बंटा है। ऊपर वाले भाग को 'परशिव' और बीच वाले हिस्से को 'पराशक्ति' कहते हैं। इन्हीं से मिलकर 'परमेश्वर' का रूप सृजित होता है, जिसका संबंध आत्मा से है।

'शिव का प्रतीक'

वैसे शाब्दिक रूप से बात करें तो संस्कृत भाषा में 'लिंग' का अर्थ 'प्रतीक' होता है और इसलिए 'शिवलिंग' का अर्थ हुआ 'शिव का प्रतीक'। इसलिए 'शिवलिंग' को भगवान शिव के पवित्र प्रतीक के रूप में पूजा जाता है।

'शिवलिंग' है अनंत

'शिवलिंग' है अनंत

इसका एक और अर्थ 'अनन्त' होना भी है। ब्रह्माड में सिर्फ दो चीजें सत्य रूप से मौजूद हैं एक है 'ऊर्जा' और दूसरा है 'पदार्थ'। हमारा शरीर मिट्टी से मिलकर बना है जो कि एक दिन इसी मिट्टी में मिल जाएगा इसलिए इसे 'पदार्थ' कहा जाता है लेकिन शरीर के अंदर की आत्मा अमर होती है वो शक्तिशाली है इसलिए उसे' ऊर्जा' कहा गया है। इसलिए शिव पदार्थ और शक्ति ऊर्जा का रूप धारण करके 'शिवलिंग' का आकार ग्रहण करते हैं।

 'अग्निस्तंभ' के रूप में परिभाषित 'शिवलिंग'

'अग्निस्तंभ' के रूप में परिभाषित 'शिवलिंग'

तो वहीं 'शिवपुराण' में भी 'शिवलिंग' की उत्पत्ति के बारे में लिखा है, वहां इसे 'अग्निस्तंभ' के रूप में परिभाषित किया गया है।

आकाश को 'शिवलिंग' कहा गया है

तो वहीं 'स्कंद पुराण' में आकाश को 'शिवलिंग' के रूप में वर्णित किया गया है। उसमे साफ तौर पर ये कहा गया है कि सभी को एक दिन इसी 'शिवलिंग' में विलीन होना है।

सिंधु घाटी की सभ्यता की खुदाई में मिले 'शिवलिंग'

सिंधु घाटी की सभ्यता की खुदाई में मिले 'शिवलिंग'

आपको बता दें कि 'शिवलिंग' की पूजा 2300 ईसा पूर्व से होती आ रही है, जिसके प्रमाण सिंधु घाटी की सभ्यता की खुदाई के दौरान सामने आए थे। आपको जानकर हैरत होगी की 'शिवलिंग' की पूजा केवल भारत में ही नहीं होती थी, बल्कि प्राची नरोमन सभ्यता के लोग भी 'शिवलिंग' को पूजते थे। बेबीलोन में खुदाई के दौरान भी 'शिवलिंग' मिले थे, जो इस बात की पुष्टि भी करते हैं।

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