Maa Annapurna's Pran Pratishtha: क्यों होती है मूर्ति में 'प्राण प्रतिष्ठा' ?
नई दिल्ली, 15 नवंबर। आज पूरे 108 साल के लंबे इंतजार के बाद मां अन्नपूर्णा की दुर्लभ मूर्ति अपने ससुराल यानी कि काशी पहुंची है, जिसकी पूरे विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ प्राण-प्रतिष्ठा की गई और उसके बाद मां की मूर्ति को काशी विश्वनाथ मंदिर में ईशान कोण में स्थापित कर दिया गया। आज काशी विश्वनाथ मंदिर का श्रृंगार ठीक वैसे हुआ है जैसे ही बहू के आगमन पर ससुराल का किया जाता है आपको बता दें कि काशी मां अन्नपूर्णा का ससुराल है, उन्होंने ही पार्वती रूप में ही भोलेनाथ से शादी की थी।

आखिर प्राण-प्रतिष्ठा क्या होती है?
आज यूपी के सीएम योगी ने मां अन्नपूर्णा की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की। आप सबके के मन में भी सवाल उठ रहे होंगे कि आखिर प्राण-प्रतिष्ठा क्या होती है और वो भी भगवान की, आखिर कोई व्यक्ति ईश्वर की प्राण-प्रतिष्ठा कैसे कर सकता है? ईश्वर की वजह से संसार का हर प्राणि सांस ले रहा है ऐसे में किसी भी मूर्ति में इंसान प्राण-प्रतिष्ठा कैसे करवा सकता है। तो चलिए आपको इस बारे में विस्तार से बताते हैं।
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प्राण-प्रतिष्ठा के बाद ही खोली जाती हैं मूर्ति की आंखें
दरअसल प्राण-प्रतिष्ठा के बिना कोई भी मूर्ति मंदिर में स्थापित नहीं होती है। प्राण-प्रतिष्ठा के जरिए देवी या देवता का आवाहन किया जाता है, जिससे कि वो मूर्ति में विराजमान होते हैं और इसके बाद वो मूर्ति भगवान रूप में मंदिर में स्थापित होती है और इसी के बाद मूर्ति की आंखें खोली जाती हैं। भारतीय धर्म में प्राण-प्रतिष्ठा का खास महत्व है। कहा जाता है कि प्राण-प्रतिष्ठा तो वो शक्ति है, जिसकी वजह से एक पत्थर भी ईश्वर का रूप धारण कर सकता है।

प्राण-प्रतिष्ठा असाधारण और अद्भुत कार्य
भारत में जितने मंदिर हैं, उनमें स्थापित हर मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा वाली ही है। यह एक असाधारण कार्य है। इसको करने वाले खुद को काफी सौभाग्य मानते हैं।

क्या है महत्व?
संसार में घटित हर चीज के पीछे कारण होता है। सनातन धर्म भी इससे अछूता नहीं है। प्राण-प्रतिष्ठा के पीछे भी बड़ा कारण है। व्यक्ति प्राण-प्रतिष्ठा के जरिए मूर्ति में संबधित भगवान का रूप देखने लग जाता है। मंत्रों और पूजा से उसका मन उस मूर्ति में भगवान की छवि निहारने लगता है और उसके समक्ष वो हर बात बिना किसी संकोच के कहने लगता है। वो पूरी श्रद्दा के साथ उस मूर्ति की पूजा करने लगता है।
मां अन्नपूर्णा ने 18 जिलों का भ्रमण किया
गौरतलब है कि माता अन्नपूर्णा की मूर्ति 11 नवंबर को राजधानी दिल्ली से वाराणसी के लिए सड़क मार्ग से रवाना हुई थी। इस दौरान माता की मूर्ति प्रदेश के 18 जिलों से होते हुए सोमवार सुबह वाराणसी जिले की सीमा पिंडरा पहुंची और उसके बाद उन्हें पूरे विधि-विधान के साथ काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित कर दिया गया।
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