Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत में क्यों बांधा जाता है धागा? क्या हैं नियम?

Vat Savitri Vrat 2026 : वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं। काशी के पंडित दयानंद शास्त्री कहते हैं कि 'यदि इस व्रत को नियमपूर्वक किया जाए तब ही माता सावित्री का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन बरगद के पेड़ पर धागा बांधने की परंपरा है, जिसे कि बहुत ही सावधानीपूर्वक और पूरी आस्था के साथ बांधना चाहिए।'

दयानंद शास्त्री ने कहा कि 'सुहागिन महिलाएं इस दिन वट वृक्ष की पूजा करते हुए उसके चारों ओर कच्चा सूत या धागा लपेटती हैं और परिक्रमा करती हैं। ऐसा करने से पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। हिंदू धर्म में वट वृक्ष यानी बरगद को अमरता, स्थिरता और दीर्घायु का प्रतीक माना गया है। इसकी जड़ें और शाखाएं लंबे समय तक जीवित रहती हैं, इसलिए इसे अटल वैवाहिक संबंध का प्रतीक भी माना गया है।'

Vat Savitri Vrat 2026

वटव़ृक्ष पर कितनी बार बांधा जाता है धागा?

अधिकतर महिलाएं वट वृक्ष की 7, 11 या 21 परिक्रमा करती हैं और हर परिक्रमा के साथ धागा लपेटती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी परंपरा अलग हो सकती है। धागा बांधने का अर्थ पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत और अटूट बनाए रखने की कामना से जुड़ा हुआ है। महिलाएं वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए धागा लपेटती हैं और माता सावित्री से अपने पति की रक्षा और लंबी उम्र का आशीर्वाद मांगती हैं।

धागा बांधते समय किन बातों का रखें ध्यान?

पूजा पूरी श्रद्धा और शांत मन से करें।कच्चे सूत या मौली का ही उपयोग करें।वृक्ष को नुकसान पहुंचाने वाले तरीके से धागा न बांधें। परिक्रमा करते समय सावित्री-सत्यवान का स्मरण करें।पति की सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करें। मान्यता के अनुसार वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों का वास होता है। इसलिए इसकी पूजा करने से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

वट सावित्री व्रत के प्रमुख नियम क्या हैं?

  • व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ या नए वस्त्र धारण करें। लाल, पीले या सुहाग के रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है।
  • पूजा शुरू करने से पहले पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत का संकल्प लें। कई महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, जबकि कुछ फलाहार करती हैं।
  • बरगद के पेड़ में त्रिदेवों का वास माना गया है। इसलिए वट वृक्ष को जल अर्पित करें, रोली-अक्षत चढ़ाएं और कच्चा सूत बांधते हुए 7 या 11 परिक्रमा करें।
  • वट सावित्री व्रत में कथा सुनना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। कथा के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।
  • व्रत के दिन विवाहित महिलाएं चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, बिछिया और मंगलसूत्र जैसे सुहाग चिन्ह जरूर पहनें।
  • गरीबों, ब्राह्मणों या जरूरतमंद महिलाओं को फल, वस्त्र और सुहाग सामग्री दान करना शुभ माना जाता है।
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