Varuthini Ekadashi 2023: वरुथिनी एकादशी पर पढ़ें ये चालीसा, जानिए क्या है पूजा मुहूर्त?

वरुथिनी एकादशी की पूजा से इंसान धनी बनता है, वो तरक्की करता है, उसके कष्टों का अंत होता है। ज्ञान-विवेक की प्राप्ति होती है।

Varuthini Ekadashi 2023:

Varuthini Ekadashi 2023: वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी वरुथिनी एकादशी कहलाती है। इस बार ये पावन दिन 16 अप्रैल को है। आपको बता दें कि वरुथिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस दिन इनके वराह रूप की पूजा करने का रिवाज है। कहा जाता है कि इस रूप को पूजने से इंसान के धन, बल और यश की वृद्धि होती है। इस दिन दान करने की प्रथा रही है, ऐसा करने से इंसान को मोक्ष की प्राप्ति होती है और उसके सारे कष्टों का अंत होचता है। इसदिन बहुत सारे लोग उपवास भी रखते हैं। इस दिन भगवान विषणु की विशेष आरती करने से इंसान को दोहरे फल की प्राप्ति होती है।

मुहूर्त

  • एकादशी तिथि का प्रारंभ : 15 अप्रैल 2023 को 08: 45 PM
  • एकादशी तिथि का अंत: 16 अप्रैल 2023 को 6: 14 PM
  • पूजा का शुभ मुहूर्त: 16 अप्रैल 2023 को 07:32 Am से 10:45 AM

वरुथिनी एकादशी चालीसा

दोहा

  • विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय।
  • कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय।

चौपाई

  • नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी ।
  • प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी, त्रिभुवन फैल रही उजियारी ॥
  • सुन्दर रूप मनोहर सूरत, सरल स्वभाव मोहनी मूरत ।
  • तन पर पीताम्बर अति सोहत, बैजन्ती माला मन मोहत ॥
  • शंख चक्र कर गदा विराजे, देखत दैत्य असुर दल भाजे ।
  • सत्य धर्म मद लोभ न गाजे, काम क्रोध मद लोभ न छाजे ॥
  • सन्तभक्त सज्जन मनरंजन, दनुज असुर दुष्टन दल गंजन ।
  • सुख उपजाय कष्ट सब भंजन, दोष मिटाय करत जन सज्जन ॥
  • पाप काट भव सिन्धु उतारण, कष्ट नाशकर भक्त उबारण ।
  • करत अनेक रूप प्रभु धारण, केवल आप भक्ति के कारण ॥
  • धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा, तब तुम रूप राम का धारा ।
  • भार उतार असुर दल मारा, रावण आदिक को संहारा ॥
  • आप वाराह रूप बनाया, हिरण्याक्ष को मार गिराया ।
  • धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया, चौदह रतनन को निकलाया ॥
  • अमिलख असुरन द्वन्द मचाया, रूप मोहनी आप दिखाया ।
  • देवन को अमृत पान कराया, असुरन को छवि से बहलाया ॥
  • कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया, मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया ।
  • शंकर का तुम फन्द छुड़ाया, भस्मासुर को रूप दिखाया ॥
  • वेदन को जब असुर डुबाया, कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया ।
  • मोहित बनकर खलहि नचाया, उसही कर से भस्म कराया ॥
  • असुर जलन्धर अति बलदाई, शंकर से उन कीन्ह लड़ाई ।
  • हार पार शिव सकल बनाई, कीन सती से छल खल जाई ॥
  • सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी, बतलाई सब विपत कहानी ।
  • तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी, वृन्दा की सब सुरति भुलानी ॥

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+